हाईकोर्ट के आदेश पर उमरी में तालाब की जमीन से हटा अतिक्रमण, जेसीबी चली
•राजस्व व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हटाए गए निर्माण, शिकायतकर्ता ने पूरी भूमि खाली न होने का किया दावा; प्रभावित पक्ष ने वैध निर्माण गिराने का लगाया आरोप
कादीपुर (सुल्तानपुर)।अखण्डनगर थाना क्षेत्र के उमरी गांव में गुरुवार को माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश और जिला प्रशासन के आदेश के अनुपालन में तालाब की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से तालाब की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाया। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही।
बताया जाता है कि उमरी गांव निवासी सभापति सिंह ने तालाब की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत करते हुए न्यायालय की शरण ली थी। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की थी। इससे पहले 11 जुलाई को भी प्रशासन द्वारा आंशिक रूप से अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप था कि तालाब की पूरी भूमि अब भी कब्जा मुक्त नहीं कराई गई है। इसके बाद जिलाधिकारी को पुनः प्रार्थना पत्र देकर शेष अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी।
इसी क्रम में गुरुवार को तहसीलदार उमेश चन्द्र यादव के नेतृत्व में राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गांव पहुंची। अधिकारियों की निगरानी में जेसीबी मशीन से तालाब की भूमि पर बने विभिन्न निर्माणों को हटाया गया। अभियान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो, इसके लिए पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा।
कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता सभापति सिंह ने कहा कि प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तो की है, लेकिन तालाब की पूरी भूमि अभी भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि सरकारी अभिलेखों के अनुसार शेष भूमि से भी कब्जा हटाया जाना चाहिए ताकि तालाब का मूल स्वरूप बहाल हो सके।
वहीं दूसरी ओर पवन सिंह सहित कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अभियान के दौरान उनकी वैध पशुशाला और बैठक को भी गिरा दिया गया, जबकि वे निर्माण तालाब की भूमि पर नहीं थे। प्रभावित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई की मांग की है।
तहसीलदार उमेश चन्द्र यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय के आदेश तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही अतिक्रमण चिह्नित किया गया और उसी के अनुसार कार्रवाई की गई। किसी भी वैध निर्माण को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।
गांव में हुई इस कार्रवाई को लेकर दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक भूमि, तालाब, चरागाह और अन्य सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि तालाब की शेष भूमि को भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है या नहीं।


























































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