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ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण की नई रूपरेखा की तैयारी तेज, सुलतानपुर में आयोग ने टटोले जमीनी हालात

•सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह बोले- संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक अध्ययन और प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर शासन को भेजी जाएंगी संस्तुतियां, जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर जुटाई गई जानकारी

सुलतानपुर। स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण की समीक्षा और भविष्य की आरक्षण व्यवस्था तय करने की दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने गुरुवार को सुलतानपुर में व्यापक मंथन किया। नवीन कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में आयोग ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर जिले की सामाजिक, आर्थिक एवं सांख्यिकीय स्थिति का विस्तृत आकलन किया।

बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयोग किसी पूर्व निर्धारित धारणा के आधार पर नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, सामाजिक अध्ययन और प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। आयोग की संस्तुतियां प्रदेश सरकार को स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण की न्यायसंगत एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भेजी जाएंगी।

बैठक में आयोग के सदस्य सेवानिवृत्त जिला जज ब्रजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला जज संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया एवं एस.पी. सिंह मौजूद रहे। वहीं जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक चारू निगम, मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक की शुरुआत जिलाधिकारी द्वारा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करने तथा मुख्य विकास अधिकारी द्वारा स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट कर सम्मानित करने से हुई। इसके बाद आयोग ने जिले में लागू आरक्षण व्यवस्था, पंचायतों के वर्गीकरण, ओबीसी आबादी, पूर्व आरक्षण व्यवस्था तथा सामाजिक एवं प्रशासनिक स्थिति से संबंधित विस्तृत अभिलेखों का परीक्षण किया।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में आयोग प्रदेश के सभी जिलों में ओबीसी की वर्तमान सामाजिक एवं जनसंख्या स्थिति का अध्ययन कर रहा है। इसी आधार पर यह तय किया जाएगा कि स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण किस प्रकार किया जाए ताकि संवैधानिक मानकों का पूर्ण पालन हो सके।

आयोग के सदस्य ब्रजेश कुमार ने कहा कि आयोग का उद्देश्य व्यापक सामाजिक अध्ययन और स्थलीय परीक्षण के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आकलन करना है। उन्होंने कहा कि सभी संस्तुतियां तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित होंगी।

बैठक में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने बताया कि जिले की 45 जिला पंचायत सीटों में 12 सीटें ओबीसी तथा 11 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। आयोग ने सामान्य, ओबीसी और अनुसूचित जाति के बीच प्रतिनिधित्व की तुलनात्मक स्थिति पर भी जानकारी ली। बैठक में जिले के 14 में से छह ब्लॉक प्रमुख उपस्थित रहे।

आयोग ने विभिन्न विकासखंडों के ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों से सीधे संवाद कर गांवों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की। अखंडनगर के मिशिरपुर जलालपुर ग्राम प्रधान रामचेत मौर्य ने बताया कि उनके गांव की लगभग 65 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग की है। बेहड़ाभारी के प्रधान अनुज यादव ने शिक्षा और रोजगार की बेहतर होती स्थिति की जानकारी दी।

शाहपुर के प्रधान तकरीर हसन ने कहा कि गांव में लगभग 1500 ओबीसी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है और उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वारी सहजन के प्रधान इंद्रजीत गुप्ता ने गांव में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की जानकारी दी, जबकि शैदपुर कला के प्रधान सुग्रीव कुमार मौर्य ने जनसंख्या के अनुपात में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

करौंदीकला विकासखंड के रामपुर दुवायल के प्रधान गया प्रसाद वर्मा ने भूमिहीन परिवारों की स्थिति और अनुसूचित जाति एवं ओबीसी आबादी के सामाजिक स्वरूप की जानकारी आयोग को दी। वहीं दोस्तपुर ब्लॉक प्रमुख राकेश सिंह ने बताया कि ब्लॉक के 59 वार्डों में 43 वार्डों में ओबीसी प्रतिनिधित्व है और सामान्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में ओबीसी उम्मीदवार निर्वाचित होकर आए हैं।

बैठक के दौरान आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अभिलेख, जनसंख्या संबंधी आंकड़े और अन्य सूचनाएं पूरी तरह प्रमाणिक, अद्यतन और निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएं। यदि किसी स्तर पर कोई कमी हो तो उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के समापन पर आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि समयबद्ध तरीके से सभी सूचनाएं उपलब्ध होने के बाद आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आयोग की संस्तुतियां स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और संवैधानिक आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित होंगी। वहीं जिला प्रशासन ने आयोग को आश्वस्त किया कि सभी आवश्यक अभिलेख एवं सांख्यिकीय विवरण निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।


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