CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM विवाद की होगी जांच
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटा दिया है। यह कार्रवाई CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और उससे जुड़ी खरीद प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद की गई है। शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश भी दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
CBSE द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की गई थी। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है और मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से किया जाता है।
हालांकि हाल के महीनों में इस प्रणाली को लेकर कई सवाल उठे। कुछ छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि OSM पोर्टल और उससे संबंधित प्रक्रियाओं में तकनीकी खामियां हैं। साथ ही खरीद प्रक्रिया और टेंडर आवंटन को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए।
केंद्र सरकार ने क्या कार्रवाई की?
विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला/पद से हटाने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव आवश्यक है।
इसके साथ ही सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया, कार्यान्वयन और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच समिति किन बिंदुओं पर करेगी पड़ताल?
जांच समिति निम्न प्रमुख बिंदुओं की समीक्षा करेगी—
- OSM प्रणाली के लिए टेंडर प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
- खरीद और तकनीकी चयन में पारदर्शिता बरती गई या नहीं।
- डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खामियां थीं या नहीं।
- छात्रों और परीक्षकों की शिकायतों का समय पर समाधान किया गया या नहीं।
- प्रणाली लागू करने में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।
छात्रों और अभिभावकों पर क्या असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई मुख्य रूप से प्रशासनिक और जांच प्रक्रिया से जुड़ी है। बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम, प्रमाणपत्र और अन्य शैक्षणिक कार्य सामान्य रूप से जारी रहेंगे। छात्रों को फिलहाल किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
शिक्षा मंत्रालय का रुख
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
CBSE देश का सबसे बड़ा स्कूली शिक्षा बोर्ड है और करोड़ों छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है। ऐसे में OSM विवाद पर केंद्र सरकार की यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि विवाद के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।






















































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