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श्री सीताराम विवाह की कथा सुन हर्षित हुए श्रद्धालु

देवरिया।बरहज नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत पचौहा वार्ड में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर पर चल रहे श्री राम कथा के चौथे दिन कथा वाचक श्री विशंभर शरण जी महाराज ने श्री सीताराम विवाह की कथा की चर्चा करते हुए कहा कि महाराज जनक द्वारा सीता जी के विवाह के लिए धनुष यज्ञ का आयोजन किया गया जनक जी ने प्रतिज्ञा की जो भगवान शिव के धनुष को तोड़ेगा उसी के साथ में अपनी बेटी जानकी का विवाह करूं धनुष यज्ञ को सुनकर देश के कोने-कोने से राजागण एकत्र हुए गोस्वामी जी ने लिखा कि दीप दीप के भूपत नाना। आए सुन ए जो प्रण मैं ठाना
 देव दनुज धारी मनुज शरीरा।
आए विपुल वीर रन धीरा।।
जनक जी के बंदी जनों में धनुष की विशेषता का उल्लेख किया उपस्थित 10,000 राजाओं में भगवान शिव के धनुष को तोड़ने की बात छोड़िए कोई दिल भर तक हिला नहीं सका जिसको लेकर महाराज जनक बड़े दुखी हुए और भरी सभा में जनक जी ने कह दिया अब जनी कोऊ माखेऊ भट मानी।
बीर विहीन महीं मैं जानी।।
जनक जी की यह बात सुन कर कर गुरुदेव विश्वामित्र ने प्रभु श्री राम को आदेश दिया कि भगवान शिव के धनुष का राम तुम भंजन करो भगवान गुरुदेव की आज्ञा पाकर प्रसन्नता पूर्वक उठे और उन्होंने गुरु को प्रणाम किया माता-पिता का स्मरण किया गणेश और शिव पार्वती का स्मरण किया फिर धनुष के निकट पहुंच गए और पूरी सभा को देखते देखते भगवान ने धनुष को उठाकर तोड़ दिया धनुष टूटते ही कथा स्थल पर जय श्री राम हर हर महादेव के नारों से पूरा पंडाल गूज उठा। जानकी जी ने प्रभु श्री राम के गले में जयमाल डाल दिया इस तरह से श्री सीताराम विवाह संपन्न हुआ
मेंली सिय राम उर माला।
श्री सीताराम विवाह की अनुपम झांकी श्रद्धालुओं के हृदय में निवास करें सबका सदा मंगल हो।
कथा के दौरान रविंद्र पाल, संत पारस महराज ,उदय भान पाल ,पतरूपाल, विद्यानिवास मिश्र, पुजारी विद्यासागर मिश्र ,रामविलास, रतनमिश्र, मनोज सिंह ,सोनू सिंह,मोनू सिंह ,बैजनाथ पाल ,राजेंद्र, रविंद्र महाराज ,राजेश सिंह, विनोद गुप्ता, मनोज मिश्रा, मनोज पटेल, लाल साहब यादव ,शकुंतला देवी, लाल परी ,किसमावती देवी ,अर्चना ,हरिशंकर, रामाज्ञा,दीनदयाल पाल सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


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