भाजपा ने महिलाओं को धोखा दिया-विजय रावत
देवरिया।बरहज विधानसभा में सपा विजय रावत के नेतृत्व में तथाकथित महिला आरक्षण बिल’ के बहाने भाजपा नारी को नारा बनाने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। सपा नेता विजय रावत ने कहा की महिलाओं के ख़िलाफ़ बेतहाशा बढ़ती हिंसा व अपराध, महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी, बीमारी और अशिक्षा की वजह से नारी भाजपा से किनारा कर चुकी है। नारी-स्वतंत्रता के विरुध्द भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की रूढ़िवादी संकीर्ण सोच और तंग नज़रिया नये जमाने की नारी शक्ति को स्वीकार्य नहीं है।ये बिल भी रूप बदलकर नारी के अधिकार का हरण करने आया है। इस बिल को लेकर हमारे सवाल और शंका हमारा विरोध नहीं है ये तो नारी के अधिकारों को बचाने की वो सकारात्मक ‘लक्ष्मण रेखा’ है जो नारी के सशक्तीकरण के लिए खींची जा रही है। तथाकथित महिला आरक्षण बिल ‘पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक’ मतलब लगभग 95% समाज की सभी महिलाओं के ख़िलाफ़ है क्योंकि इससे महिलाओं के बीच विभाजन करने की साज़िश की जा रही है। ये महिला को अधिकार देने की नहीं बल्कि आज उनकी शक्ति को बाँटकर बेहद कमज़ोर करने व कल को उनके हक़ को छीनने की छद्म योजना है। भाजपा के वैचारिक पूर्वजों ने आज़ादी से पहले देश को बाँटने में अपनी भूमिगत भूमिका निभाई और फिर उनके संगी-साथियों ने आज़ादी के बाद भी नफ़रत के नाम पर समाज के भाईचारे, अमन-चैन को बाँटने की ‘कुटिल करतूत’ जारी रखी और अब ये नकारात्मक लोग अपनी नारी-विरोधी सामंती सोच के कारण देश की ‘आधी आबादी’ मतलब महिलाओं की ताक़त बाँटने और हमेशा के लिए दबाये रखने का षडयंत्र कर रहे हैं, जिससे कि आज की जागरूक नारी की विरोध की क्षमता बँट जाए, घट जाए, मिट जाए।ये बिल नहीं है, भाजपा की दरारवादी राजनीति का ‘काला दस्तावेज़’ है। जिन्होंने नारी को अपने संगठनों में मान-सम्मान नहीं दिया, वो राजनीति में क्या स्थान देंगे।अगर पिछडों की आबादी कम-से-कम केवल 66% भी मान ली जाए, तो इनमें ‘आधी आबादी’ मतलब महिलाएं 33% होंगी। जिनके हक़ की बात नहीं हो रही है, इसका मतलब ये बिल 33% महिलाओं को हक़ देने के लिए नहीं बल्कि उनका हक़ मारने के लिए लाया जा रहा है। ये भाजपा और उनकी वर्चस्ववादी महिला विरोधी सांमती सोच की साज़िश है, जिसका हम विरोध करते रहेंगे… इसके लिए भी चाहे ‘साल लगे या सदी’। दरअसल ये 33% महिलाओं को आरक्षण दे नहीं रहे हैं बल्कि 33% महिलाओं से आरक्षण छीन रहे हैं।हम बिल के विरोध में नहीं है सिर्फ़ उनके उस शोषणकारी तरीक़े के ख़िलाफ़ हैं, जिसकी मंशा ख़राब है। अगर किसी काम को करने की सही मंशा होती है, तो शंका नहीं होती है। दरअसल ये हार की हड़बड़ी में उठाया गया क़दम है, इसके पीछे कोई तैयारी नहीं है। हमारे बीच इस बिल को लेकर इसलिए रोष है, क्योंकि प्रक्रिया का दोष है। इस बिल में खोट है, क्योंकि भाजपा की नज़र में सिर्फ़ वोट है। दरअसल महिला आरक्षण बिल का तो आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीटों का 1/3 (एक तिहाई) है तो इसका मतलब हुआ कि ये गणित का विषय है और गणित का आधार अंक होते हैं, संख्याएं होती हैं, कोई हवा हवाई बात नहीं। और इस तरह के मामले में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना होती है। जब महिलाओं की जनसंख्या के लिए 2011 के पुराने आँकड़ों को आधार बनाएंगे तो महिला आरक्षण की आधारभूमि ही गलत होगी, जब भूमि में ही दोष होगा तो सच्ची फसल कैसे उगेगी। जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा।ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं दरअसल उसके पीछे भाजपाइयों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े क्योंकि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आँकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी। ये भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक व आदिवासी महिलाओं का अधिकार लूटा जा रहा है तथाकथित महिला आरक्षण बिल’ महिलाओं और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं।इस दौरान मुख्य रूप से अमित प्रधान संजय सिंह राहुल यादव अजीत जोगी विकास यादव विरेंद्र कुमार रणविजय सिंह दिनेश यादव विक्की सिंह महावीर गुप्ता इत्यादि लोग उपस्थित थे।
























































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