Religion and Culture / धर्म और संस्कार

आध्यात्मिक चिंतन विशेष हनुमानजी ने सुग्रीव को किष्किन्धा का और विभीषण को लंका का राजा बनाया — बृजेश मणि त्रिपाठी

देवरिया।गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीहनुमान चालीसा में लिखते हैं—

 

«तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राजपद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

लंकेस्वर भए सब जग जाना।।»

 

इन चौपाइयों में एक अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक संदेश निहित है। हनुमानजी ने श्रीराम के दो भक्तों—सुग्रीव और विभीषण—को राजपद तो दिलाया, किंतु दोनों के लिए अलग-अलग मार्ग अपनाए।

 

सुग्रीव पर उन्होंने उपकार किया। उन्हें श्रीराम से मिलाया, दोनों की मित्रता कराई और अंततः किष्किन्धा का राज्य दिलाया। वहीं विभीषण को उन्होंने उपदेश दिया कि यदि अपने सभी दुखों का अंत चाहते हो तो श्रीराम की शरण ग्रहण करो। विभीषण ने इस मंत्र को स्वीकार किया, श्रीराम की शरण में आए और अंततः लंका के राजा बने।

 

यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी पद की प्राप्ति—चाहे वह सांसारिक हो या आध्यात्मिक—हनुमानजी की कृपा से संभव है। सांसारिक पद सीमित होता है, जबकि आध्यात्मिक दृष्टि से भगवान का भक्त बनना सर्वोच्च पद माना गया है। सुग्रीव और विभीषण दोनों को हनुमानजी की कृपा से भौतिक और आध्यात्मिक, दोनों प्रकार की सफलता प्राप्त हुई।

 

तुलसीदास जी के अनुसार, मनुष्य अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार दो मार्गों में से किसी एक को अपना सकता है। पहला मार्ग है—हनुमानजी की शरण में जाकर उनसे कृपा और उपकार की प्रार्थना करना, जैसा सुग्रीव ने किया। दूसरा मार्ग है—हनुमानजी की सलाह को जीवन में उतारना, जैसा विभीषण ने किया।

 

हनुमानजी विभीषण से कहते हैं—

 

«सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती।

करहिं सदा सेवक पर प्रीती।।»

 

फिर अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहते हैं—

 

«अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर।

कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर।।»

 

अर्थात् श्रीराम अपने सेवकों से सदैव प्रेम करते हैं और उन पर बिना किसी कारण भी कृपा बरसाते हैं। विभीषण ने प्रभु की शरण स्वीकार की, उनके सेवक बने और भगवान की कृपा से लंका का राज्य प्राप्त किया।

 

अंत में प्रश्न उठता है कि इन दोनों मार्गों में कौन-सा मार्ग अपनाया जाए? व्यक्तिगत रूप से ऐसा प्रतीत होता है कि हनुमानजी के चरणों में समर्पित होकर उनकी कृपा की याचना करना अधिक सहज और सरल है। हालांकि यह केवल व्यक्तिगत सुझाव है। प्रत्येक साधक अपने विवेक, श्रद्धा और आस्था के अनुसार मार्ग का चयन करे।


Leave a comment

Educations

Sports

Entertainment

Lucknow

Azamgarh