हल षष्ठी व्रत, महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और संतान की दीर्घायु के लिए रखा व्रत
देवरिया ।भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि के पावन अवसर पर, देवरिया जनपद के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल परमहंस आश्रम (बरहज) परिसर में हल षष्ठी (हरछठ) का त्योहार पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सरयू तट पर स्थित इस पावन धाम में क्षेत्र की सैकड़ों माताओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए ऐतिहासिक रूप से निर्जला व्रत रखकर भगवान हलधर (बलराम जी) और छठी माता की विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर आश्रम परिसर में सामूहिक पूजा का भव्य आयोजन किया गया। व्रती महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतीकात्मक तालाब (पोखरा) बनाया। उसमें पलाश, कांस और झरबेरी की झाड़ियां गाड़कर विधि-विधान से पूजन किया। भगवान बलराम के प्रतीक स्वरूप हल की पूजा की गई और भैंस के दूध, दही, घी तथा महुए का पारम्परिक भोग लगाया गया। पूजा के दौरान महिलाओं ने हल षष्ठी की महिमा से जुड़ी पौराणिक कथाएं सुनीं।आश्रम में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से पुष्पा पाण्डेय, रेखा मिश्रा, पूनम देवी, श्रेया देवी, शकुन्तला मिश्रा, सुनैना देवी, प्रियंका देवी आकांक्षा मिश्रा सहित भारी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं उपस्थित रहीं। उपस्थित महिलाओं ने सामूहिक रूप से आरती गाकर अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और विश्व कल्याण की कामना की। कथा अभय कुमार पाण्डेय ने कहा। आरती के पश्चात व्रती महिलाओं ने हल से जोते गए अनाज का पूरी तरह त्याग कर, तालाब में उगने वाले पसई के चावल (तिन्नी का चावल) और महुए का पावन प्रसाद ग्रहण किया। पूरा आश्रम परिसर छठी माता के जयकारों से गुंजायमान रहा।




















































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