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सुलतानपुर में सड़क हादसों पर लगेगी लगाम, 1 जुलाई से चलेगा ‘मिशन सेफ फ्यूचर’

•जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एडीएम ने दिए निर्देश, ब्लैक स्पॉट सुधरेंगे, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

सुलतानपुर। जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी तथा व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से सोमवार को नवीन कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) राकेश सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, यातायात व्यवस्था को मजबूत करने और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी अनुपालन को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले में एक जुलाई से 15 जुलाई तक ‘मिशन सेफ फ्यूचर अभियान’ चलाया जाएगा। अभियान के तहत सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के साथ ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा।

एडीएम राकेश सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें लापरवाही, तेज रफ्तार, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चलाने तथा गलत दिशा में वाहन संचालन के कारण होती हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिले के सभी दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉटों का स्थलीय निरीक्षण कर सुधारात्मक कार्य तत्काल कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि जहां लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं, वहां रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड, रेडियम साइनेज, रंबल स्ट्रिप, व्हाइट लाइन मार्किंग और टेबल-टॉप स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।

यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतने के भी निर्देश दिए गए। बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने और मॉडिफाइड साइलेंसर का प्रयोग करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भारी वाहनों के लिए लागू नो-एंट्री व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने और शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।

बैठक में स्कूल बसों, यात्री और वाणिज्यिक वाहनों की नियमित फिटनेस जांच सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। वाहन चालकों के आई टेस्ट कराने और बिना फिटनेस वाले तथा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने की बात कही गई। साथ ही 15 वर्ष से अधिक पुराने और पंजीकरण समाप्त वाहनों के स्कूलों में उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।

सड़क दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि यूपीडा और एनएचएआई की ओर से आवश्यकतानुसार क्रेन, जीपीएस समेत अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। दुर्घटना संभावित मार्गों पर एंबुलेंस और क्रेन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को दो लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा अवैध कट बंद कराने, अवैध होर्डिंग हटाने, प्रमुख चौराहों पर प्रकाश व्यवस्था मजबूत करने और सड़क सुरक्षा संकेतकों की स्थापना पर भी जोर दिया गया।

एडीएम ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बढ़ाकर सड़क सुरक्षा के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।


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