आंगनबाड़ी कार्यकत्री की समर्पित पहल से कुपोषित बच्चा हुआ स्वस्थ
देवरिया।रामपुर कारखाना विकासखंड के मदरापाली खास आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकत्री राजकुमारी यादव ने अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए एक कुपोषित बच्चे को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर उनकी निरंतर सक्रियता क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायी बनी है।
राजकुमारी यादव बताती हैं कि गृह भ्रमण के दौरान उन्हें आफताब नाम का एक बच्चा मिला, जो काफी कमजोर था। बच्चे की स्थिति को देखते हुए उन्होंने तत्काल एएनएम को जानकारी दी। जांच के बाद बच्चे का एनआरसी में पंजीकरण कराया गया और उसे नियमित निगरानी में रखा गया। उन्होंने बच्चे की मां को पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी देते हुए खान-पान में सुधार के लिए प्रेरित किया।
पोषण सप्ताह के दौरान राजकुमारी ने परिवार को बताया कि घर में उपलब्ध सामान्य खाद्य पदार्थों से भी बच्चे के पोषण में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने दलिया, खिचड़ी, दाल, अंडा, दूध, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़-चना और मूंगफली आदि पौष्टिक खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने की सलाह दी। बच्चे की मां ने भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री के सुझावों को गंभीरता से अपनाया।
लगातार निगरानी और संतुलित आहार के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। राजकुमारी यादव नियमित रूप से बच्चे के घर जाकर उसका वजन करती रहीं और उसके स्वास्थ्य की निगरानी करती रहीं। कुछ समय बाद बच्चे की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वह सामान्य श्रेणी में आ गया। अब आफताब स्वस्थ होकर आंगनबाड़ी केंद्र पर नियमित आता है तथा पढ़ाई और खेलकूद की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेता है।
राजकुमारी यादव कहती हैं कि आफताब को स्वस्थ और सक्रिय देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। उनके अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकत्री की जिम्मेदारी केवल केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-घर पहुंचकर बच्चों और महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आफताब के स्वास्थ्य में सुधार के साथ गांव की अन्य माताओं में भी जागरूकता बढ़ी है। अब महिलाएं बच्चों के टीकाकरण, पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच पर विशेष ध्यान दे रही हैं। राजकुमारी यादव ग्रामीण महिलाओं को घर के आसपास तुलसी, सहजन, मेथी जैसी उपयोगी पौध लगाने तथा पोषण के लिए स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
राजकुमारी यादव का कहना है कि यदि सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां इसी लगन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें तो कुपोषण के खिलाफ प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। आफताब की मुस्कान उनके लिए केवल एक बच्चे के स्वस्थ होने की खुशी नहीं, बल्कि उनके प्रयासों की सार्थकता का प्रमाण है।
























































Leave a comment