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उत्तर प्रदेश के साढ़े तीन लाख प्राईवेट स्कूल टीचर को बड़ी राहत प्रदेश सरकार लाने जा रही है नई नियमावली, सात सदस्यीय समिति का गठन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के निजी माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों के हितों की सुरक्षा के लिए सेवा नियमावली तैयार करने जा रही है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति की देखरेख में सेवा नियमावली तैयार की जाएगी, जिससे निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की सेवा शर्तें स्पष्ट होंगी और बिना उचित कारण उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा। नई सेवा नियमावली लागू होने के बाद निजी विद्यालयों के प्रबंधतंत्र की मनमानी पर अंकुश लगेगा। शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा तथा उनका वेतन आधार से जुड़े बैंक खाते में भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा अवकाश, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से संबंधित प्रावधान भी नियमावली में शामिल किए जाएंगे। नियमावली के तहत निजी विद्यालयों में केवल निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। हाईस्कूल स्तर तक प्रशिक्षित स्नातक के साथ बीएड, इंटर कॉलेजों में परास्नातक एवं बीएड तथा कक्षा आठ तक बीटीसी/डीएलएड के साथ टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति के प्रावधानों को प्रभावी बनाने पर भी जोर रहेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप सचिव चंद्र प्रकाश मिश्र की ओर से सात सदस्यीय समिति के गठन का आदेश जारी किया गया है। समिति में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है। उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को उनकी योग्यता और मेहनत के अनुरूप वेतन व सुविधाएं मिलनी चाहिए। वहीं उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता डॉ. आर.पी. मिश्रा ने मांग की है कि निजी विद्यालयों के संसाधनों और छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों का न्यूनतम वेतन भी निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों के कई निजी विद्यालयों में शिक्षकों को मात्र 5 से 6 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है, जबकि बड़े कॉन्वेंट विद्यालयों में यह वेतन 50 हजार रुपये या उससे अधिक है। सरकार की इस पहल से निजी विद्यालयों में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


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