सावन मे रहे सावधान : शिवलिंग पर कभी भी उत्तर दिशा में ही मुख कर करें जलाभिषेक - आचार्य अजय शुक्ल
•सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई से और समापन होगा 28 अगस्त को
•कटे फ़टे बेलपत्र न करें भोलेनाथ को अर्पित
देवरिया। सनातन धर्म व संस्कृति के अनुसार श्रावण मास सबसे पवित्र मास माना जाता है यह मास विशेष रूप से बाबा भोलेनाथ के पूजा अर्चना के लिए समर्पित है। वैसे आप भोलेनाथ की पूजा अर्चना सुमिरन आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन सावन के पावन महीने में शिवपूजन विशेष शुभ और फलदायक होता है। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा। उन्होंने कहा कि कभी भी शिवलिंग पर उत्तर दिशा में मुख करके ही जलाभिषेक करना चाहिए, पूरब दिशा में मुख करके जलाभिषेक करना अहितकारी होता है।प्रदोष काल में भगवान शिव का रुद्राभिषेक ,पूजन और उनके मन्त्र जाप का अक्षय पुण्यफल प्राप्त होता है। बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना में कभी भी भूलकर भी हल्दी,तुलसी पत्र,शंख, चंपा फूल व केतकी के फूल का प्रयोग नही करना चाहिए ।इनके प्रयोग करने मात्र से ही मनुष्य का जीवन कष्टमय हो सकता है। इनके पूजन में कटे फ़टे हुए बेलपत्र का प्रयोग नही करना चाहिए।बेल पत्र व शमी पत्र को उल्टा चढ़ावे तथा उसके पीछे का भाग जिसे वज्र कहते हैं उसकी डंठल को निकालकर ही शिवजी को अर्पित करें।शिवलिंग का अभिषेक दूध,दही,शहद,घी, गंगाजल और चीनी से कर सकते हैं।भगवान शिव को सात्विक चीज जैसे फल,मिष्टान्न, आदि का भोग लगावें ।भगवान शिव सभी देवताओं में सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं लेकिन पूजा पवित्र व सच्चे मन से होनी चाहिए।हर व्यक्ति को सावन के महीने में अपने सामर्थ्य के अनुसार बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करना चाहिए। जलाभिषेक पहले जल ,फिर कच्चा दूध दुबारा शुद्ध जल से अभिषेक करें, तीन बार जलाभिषेक विशेष फलदायक होता है।अगर द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर जलाभिषेक करने का सौभाग्य मिले तो वह सबसे ज्यादा फल दायी होता है। पूजन में हमेशा तांबे, कांसे या चांदी के पात्र में ही जलाभिषेक करें।























































Leave a comment