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वाहन चेकिंग के बीच सवालो के घेरे में खाकी बिना डिजिटल नंबर प्लेट और बीमा के दौड़ती दिखी दरोगा की बुलेट आम जनता पर सख्ती, लेकिन नियम तोड़ने पर पुलिसकर्मी पर कार्रवाई क्यों नहीं?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो-तस्वीरों के बाद उठी निष्पक्ष जांच की मांग
आजमगढ़। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार के निर्देश पर जनपद में चल रहे सघन वाहन चेकिंग अभियान के बीच एक मामला सामने आया है, जिसने विभागीय अनुशासन और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजमगढ़-लखनऊ मार्ग पर सरायमीर थाना क्षेत्र में एक दरोगा की बुलेट मोटरसाइकिल बिना डिजिटल नंबर प्लेट और वैध बीमा के दौड़ती नजर आई, जिसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। जानकारी के अनुसार, संबंधित दरोगा सरायमीर कस्बे में नियमित रूप से वाहन चेकिंग अभियान में सक्रिय रहते हैं और नियमों के उल्लंघन पर आम नागरिकों के चालान काटते देखे जाते हैं। वहीं उनकी स्वयं की बाइक पर न तो डिजिटल नंबर प्लेट लगी थी और न ही वैध बीमा पाया गया। ऑनलाइन जांच में बाइक का बीमा भी अमान्य बताया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहन चेकिंग के दौरान आम नागरिकों से डिजिटल नंबर प्लेट न होने पर 5 से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना, बीमा न होने पर 2 से 4 हजार रुपये तक का फाइन और कई मामलों में वाहन सीज तक किए जा रहे हैं। ऐसे में जब खुद कानून के रखवाले नियमों का पालन नहीं करते दिखें, तो जनता में असंतोष और अविश्वास स्वाभाविक है। इस प्रकरण ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन की सख्ती पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या कानून सबके लिए समान है। लोगों का कहना है कि यदि आम जनता से नियमों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है, तो वही मानक पुलिसकर्मियों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए। जनता अब पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है, ताकि कानून का तराजू सभी के लिए बराबर रहे, चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी अधिकारी।


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