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परिषदीय शिक्षा की जमीनी हकीकत चौंका ने वाली

देवरिया।शासन भले ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ढिंढोरा पीट रहा हो, लेकिन बरहज नगर और ग्रामीण अंचल में परिषदीय शिक्षा की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। जहाँ एक कंपोजिट विद्यालय में 8 शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है, वहीं बरहज के 60 प्रतिशत विद्यालय एक-दो शिक्षक और शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। नगर के जयनगर कंपोजिट विद्यालय में मात्र एक शिक्षक और एक शिक्षामित्र तैनात हैं। गौरा कंपोजिट विद्यालय दो शिक्षामित्र और एक शिक्षक के सहारे है। प्राथमिक विद्यालय नंबर-2 जयनगर की भी यही स्थिति है। यहाँ तक कि पीएम श्री विद्यालय जैसा मॉडल स्कूल भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। एक प्रधानाध्यापक के कंधे पर 200 से 300 बच्चों की पूरी जिम्मेदारी है। वही प्रार्थना कराए, हाजिरी बनाए, मिड-डे मील का हिसाब लिखे, ऑनलाइन फीडिंग करे और फिर 8 कक्षाओं को पढ़ाए भी। ऐसे में पढ़ाई क्या होगी, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। बच्चे किताब, ड्रेस, जूता-मोजा तो पा रहे हैं, पर शिक्षा नहीं पा रहे। मध्यम वर्ग दोहरी मार में दूसरी तरफ निजी स्कूलों में फीस का आतंक है। 30 से 50 हजार रुपये सालाना फीस, हर साल सिलेबस बदलकर किताब-कॉपी और ड्रेस के नाम पर हजारों की वसूली की जा रही है। महंगाई में निजी स्कूलों की मार से हारकर अभिभावक सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं, पर वहाँ शिक्षक ही नहीं हैं। अभिभावकों में डर है कि कहीं उनके बच्चे शिक्षा से वंचित न रह जाएं। महेंद्र कुमार, रमेश चौहान, अमरेन्द्र मिश्र, नूर आलम, जावेद अंसारी, सावित्री देवी, गीता रानी सहित अनेक अभिभावकों ने सरकार से तत्काल शिक्षकों की तैनाती और निजी स्कूलों की फीस का एक समान स्लैब तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि गुरुकुल परम्परा में राजा और रंक के बच्चे एक साथ पढ़ते थे, कोई भेदभाव नहीं था। आज शिक्षा में ही अमीर-गरीब की सबसे बड़ी खाई बन गई है। मानक विहीन स्कूल और अफसरों की दोस्ती नगर से देहात तक बिना मान्यता के स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं। फरमान आता है तो अफसर आते हैं, नोटिस थमाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और हिस्सा मिलते ही वही स्कूल उनके मित्र बन जाते हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी देव मुनि वर्मा ने बताया कि नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, जिसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। निजी एवं अमानक विद्यालयों पर नकेल कसने के लिए लगातार नोटिस दिया जा रहा है। यदि कोई विद्यालय मानक के विपरीत फीस लेता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में सेंट पॉल सहित अन्य विद्यालयों को नोटिस दिया गया था, उसके बावजूद क्षेत्र में गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय चल रहे हैं। राजनगर में बिना नाम का एक विद्यालय संचालित हो रहा है, जिसके प्रबंधन को जुलाई में नोटिस दिया गया है। एसआरएम, इंडिया पब्लिक स्कूल एवं सनराइज पब्लिक स्कूल की मान्यता नर्सरी से पांच तक है, लेकिन इंटर तक संचालित हो रहा है। सेंट मेरी की अस्थायी मान्यता कक्षा 1 से 8 तक है, लेकिन यह भी इंटर तक चल रहा है। नोटिस के बाद भी ये विद्यालय बंद नहीं हुए हैं। नगर में ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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