केवट प्रसंग के कथा का कराया रसपान
देवरिया।स्थानीय बरहज में श्री कृष्णा इंटर कॉलेज के प्रांगण मैं चल रहे श्री राम कथा के विश्राम दिवस पर दिन अवध धाम से पधारे हुए आचार्य धीरज कृष्ण शास्त्री ने केवट प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान को 14 वर्ष का कैकयी द्वारा बनवास दिए जाने पर भगवान बन की यात्रा पर निकल पड़े सर्वप्रथम तमसा के तट पर भगवान ने अपने पूरे प्रजा सहित विश्राम किया दूसरे दिन प्रभु श्री राम लक्ष्मण माता जानकी गंगा के पावन तट पर पहुंचे और निषाद राज केवट से भगवान ने गंगा पार उतरने की बात कही भगवान ने केवट से नव मांगी लेकिन केवट आने से इनकार करता रहा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज मानस में लिखते हैं कि
मांगी नाव न केवट आना। कहही तुम्हार मर्म मैं जाना।
केवट ने कहा प्रभु मैं आपके विषय में भली बात जानता हूं कि आपके कर कमल में जादू है आप पत्थर को भी स्त्री बना देते हैं इसलिए यह मेरी नाव तो काठ की है अगर मेरी नाव स्त्री बन जाएगी तो मेरे बच्चे परिवार भूखों मरने लगेंगे भगवान ने कहा की केवट तुम चिंता ना करो कवट ने कहा प्रभु चिंता क्यों ना करें। जो तरनी घरनी होई जाई।तब क्या होगा।यही प्रतिपालेउ सब परिवारू।
इसी से परिवार का भरण पोषण करता हूं दूसरा कार्य भी नहीं जानता भगवान के बार-बार कहने पर केवट ने कहा प्रभु आपके लिए एक विकल्प है भगवान ने पूछा क्या केवट ने कहा कि अगर आप पार जाना चाहते हैं तो चरण धुलना पड़ेगा भगवान मुस्कुराए यात्रा में विलंब हो रहा था भगवान ने कहा कि यह असर तुम मुझे मंजूर है जैसे ही भगवान ने स्वीकार किया केवट गदगद हो गया और अपने घर परिवार वालों को आदेश दिया घर में जितने छोटे बड़े पात्र हो लेकर आओ प्रभु का पैर धोना है
केवट राम रजायसु पावा।
पानी कठवता भरि लेई आवा।।
फिर अति आनंद उमगि अनुरागा।
चरण सरोज पखारन लागा।।
जब भगवान का चरण कठौता में रखकर धोने लगा तो भगवान एक पैर पर खड़े थे और डगमगाने लगे तब केवट ने कहा प्रभु मेरा सीर पकड़ लीजिए केवट कितना सौभाग्यशाली है की प्रभु का पैर धोकर और प्रभु के कर कमलों द्वारा मस्तक पर हाथ रखकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है। आज देवता भी बोल पड़े केवट तुम धन्य हो यह सौभाग्य हम लोगों को कभी नहीं मिला।
केवट केवट भगवान को पर उतरने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं करता है केवट जानबूझकर विलंब कर रहा है क्योंकि केवट सोचता है कि भगवान का यह दिव्य दर्शन तभी तक प्राप्त है जब तक प्रभु माता जानकी और लक्ष्मण सहित इस नाव में विराजमान है फिर यह सुंदर दृश्य देखने को नहीं मिलेगा।
केवट भगवान को पर उतरने से पहले अपने पूर्वजों को का कल्याण किया फिर पद पखारि जल पान करिआपु सहित परिवार ।
पितर पार करि प्रभु पुनि
मुदित लै गयऊ पार ।।
केवट ने प्रभु को गंगा पार कराया भगवान की यह दिव्या झांकी आप सभी के हृदय में निरंतर निवास करें।
कथा के दौरानआजनेय दास जी महाराज, श्री गणेश नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ,रामप्यारे मोहन सोनी, अमित तिवारी तिवारीपुर, , मुरली मनोहर उपाध्याय ,शेषनाथ रावत ,अनमोल मिश्रा, अभय पांडे ,आंचल पाठक, श्याम जी मिश्रा, केदरबारी, रामनिवास उपाध्याय ,उमा मद्धेशिया, जनार्दन बरनवाल, प्रदीप मद्धेशिया, जयप्रकाश शास्त्री नागेंद्र मिश्रा सुभाष यादव, ओमप्रकाश दुबे ,दिनेश मणि त्रिपाठी ,हरेंद्र तिवारी, राधेश्याम तिवारी, रामनिवास मद्धेशिया, अमला भगत, मनोज गुप्ता, अर्जुन कुमार, मैनेजर तिवारी, सुजीत सोनी, गिरजा सोनी, माया सोनी, शशि कला शर्मा, हेमलता शर्मा ,आकांक्षा मिश्रा, अमृता मिश्रा, रेखा मिश्रा, पदमा दीक्षित, पूजा द्विवेदी, पूनम पांडे, पुष्पा पांडे, रीता यादव, वंदना यादव ,मनोरमा तिवारी, कुमकुम तिवारी सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


























































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