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भगत सिंह ने फांसी से पहले कहा था: "दुश्मन को यह दिखा दो कि एक क्रांतिकारी कैसे अपने जीवन का अंत करता है!"
भगत सिंह ने फांसी के समय अंग्रेज अधिकारियों से कहा था:
"इन्कलाब जिंदाबाद!"
ऐसा कहा जाता है कि जब उन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दी जा रही थी, तो वे हंसते-हंसते फांसी के फंदे की ओर बढ़े और अपने क्रांतिकारी विचारों को प्रकट करते हुए अंतिम सांस तक निडर बने रहे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके विचार मरने वाले नहीं हैं, बल्कि वे और ज्यादा ताकत से उभरेंगे।
एक अन्य कथन के अनुसार, उन्होंने फांसी से पहले कहा था:
"दुश्मन को यह दिखा दो कि एक क्रांतिकारी कैसे अपने जीवन का अंत करता है!"
उनकी शहादत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को और अधिक प्रेरित किया और उन्हें अमर शहीद बना दिया।



























































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