धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने का पर्व नहीं, स्वास्थ्य, संस्कार और समृद्धि का देता है संदेश
•भारतीय संस्कृति में धनतेरस : विविध आयाम एवं उपादेयता
प्रो. अजय कुमार मिश्र
देवरिया।भारत त्योहारों और पर्वों का देश है। यहां मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहार का अपना धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल आनंद और उत्सव के अवसर नहीं हैं, बल्कि ये जीवन-मूल्यों, परंपराओं, आस्थाओं तथा सामाजिक एकता के संवाहक भी हैं।
दीपावली के पंचदिवसीय महापर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है। इसे धनत्रयोदशी अथवा धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। 'धनतेरस' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। 'धन' अर्थात संपत्ति एवं समृद्धि तथा 'तेरस' अर्थात त्रयोदशी तिथि। यह पर्व हमें धन, स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन का संदेश देता है।
1. धनतेरस की ऐतिहासिकता एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
धनतेरस की ऐतिहासिकता भारतीय पौराणिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। इस पर्व के संबंध में प्रमुख रूप से दो कथाएं प्रचलित हैं।
समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के उद्देश्य से समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से अनेक बहुमूल्य रत्नों एवं दिव्य वस्तुओं की प्राप्ति हुई। इसी क्रम में भगवान विष्णु के अंशावतार भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक तथा देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनके हाथों में अमृत कलश होने के कारण वे आरोग्य, दीर्घायु और जीवन-संरक्षण के प्रतीक माने जाते हैं। इसी मान्यता के आधार पर कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है।
राजा हेम और उनके पुत्र की कथा
एक अन्य प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की अल्पायु में मृत्यु होने की भविष्यवाणी की गई थी। उसकी पत्नी ने मृत्यु के नियत दिन अपने पति को सोने नहीं दिया तथा घर के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषणों और दीपकों का प्रकाश किया। ऐसी मान्यता है कि दीपों के प्रकाश और आभूषणों की चमक से यमराज भ्रमित हो गए और राजकुमार का जीवन बच गया।
इसी लोकमान्यता के आधार पर धनतेरस की रात्रि में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमदीप जलाने की परंपरा प्रचलित हुई।
इन कथाओं ने धनतेरस को धार्मिक आस्था, आरोग्य और जीवन की मंगलकामना से जोड़ दिया है।
2. धनतेरस की धार्मिक महत्ता
भारतीय धर्म और अध्यात्म की दृष्टि से धनतेरस अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर परिवार के सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य और रोगमुक्त जीवन की प्रार्थना की जाती है।
माता लक्ष्मी की आराधना से घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं भगवान कुबेर को धन का अधिपति मानकर उनकी पूजा आर्थिक उन्नति और धन-धान्य की समृद्धि के लिए की जाती है।
इस दिन संध्या के समय घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की मंगलकामना और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। साथ ही सोना, चांदी, बर्तन तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है।
इस प्रकार धनतेरस केवल धन अर्जित करने का पर्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, दीर्घायु और आध्यात्मिक समृद्धि का भी प्रतीक है।
3. धनतेरस की सांस्कृतिक महत्ता
भारतीय संस्कृति में धनतेरस का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह पर्व सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी समृद्ध करता है।
इस अवसर पर घरों की साफ-सफाई, सजावट, रंगोली, दीप प्रज्वलन तथा नए बर्तन खरीदने की परंपरा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर घर की सफाई, खरीदारी और पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। इससे पारिवारिक प्रेम एवं सहयोग की भावना मजबूत होती है।
धनतेरस का पर्व व्यापारियों, स्वर्णकारों, कुम्हारों, बर्तन निर्माताओं तथा छोटे दुकानदारों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर बाजारों में विशेष चहल-पहल रहती है और स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलता है।
रंगोली बनाना, मिट्टी के दीपक जलाना, घरों को सजाना तथा पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी करना लोककला और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देता है।
अतः धनतेरस भारतीय संस्कृति में परंपरा, आस्था, पारिवारिक सद्भाव और आर्थिक गतिविधियों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
4. आज के लोकजीवन में धनतेरस की उपादेयता
वर्तमान समय में धनतेरस की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। आधुनिक जीवन में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति में इतना व्यस्त हो गया है कि वह स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और मानसिक शांति की उपेक्षा करने लगा है। ऐसे समय में धनतेरस का पर्व हमें जीवन के वास्तविक मूल्यों का स्मरण कराता है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता:
भगवान धन्वंतरि की पूजा हमें यह संदेश देती है कि धन से अधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य है। स्वस्थ शरीर ही सुखी जीवन का आधार है। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य संरक्षण, योग, व्यायाम और संतुलित आहार का संकल्प लेना चाहिए।
आर्थिक समृद्धि एवं बचत की प्रेरणा:
धनतेरस हमें धन के सदुपयोग, आर्थिक नियोजन और बचत का महत्व समझाता है। हमें अनावश्यक खर्च करने के बजाय अपनी आवश्यकताओं के अनुसार धन का उपयोग करना चाहिए।
स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहन:
इस अवसर पर स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों, शिल्पकारों और छोटे व्यापारियों से वस्तुएं खरीदकर उनकी आजीविका को सहयोग दिया जा सकता है।
सामाजिक सद्भाव की स्थापना:
यह पर्व समाज में प्रेम, सहयोग, सद्भावना और परस्पर सम्मान की भावना को विकसित करता है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश:
आज धनतेरस को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना आवश्यक है। मिट्टी के दीपक, प्राकृतिक सजावट और स्थानीय उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। अनावश्यक प्लास्टिक और प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं से बचना चाहिए।
नारी एवं पारिवारिक सहभागिता:
घर की सजावट, पूजा-पाठ, खरीदारी और पारिवारिक आयोजन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह पर्व पारिवारिक सहभागिता एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
इस प्रकार धनतेरस आज भी भारतीय लोकजीवन में आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और नैतिक दृष्टि से उपयोगी है।
5. धनतेरस मनाने की विधि
धनतेरस का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसकी सामान्य पूजा-विधि निम्नलिखित है।
प्रथम चरण : घर की साफ-सफाई एवं सजावट
धनतेरस से पहले घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है। घर के मुख्य द्वार को फूलों, आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है।
द्वितीय चरण : शुभ वस्तुओं की खरीदारी
इस दिन परंपरानुसार सोना, चांदी, तांबे, पीतल अथवा अन्य धातुओं के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी खरीदी जा सकती हैं।
तृतीय चरण : भगवान धन्वंतरि की पूजा
संध्या के समय पूजा स्थल पर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित किया जाता है। उन्हें पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य अच्छे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करते हैं।
चतुर्थ चरण : माता लक्ष्मी एवं भगवान कुबेर की पूजा
माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करके परिवार की आर्थिक उन्नति, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
पंचम चरण : यमदीपदान
धनतेरस की संध्या को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाया जाता है। इसे यमदीप कहा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
षष्ठम चरण : दीप प्रज्वलन एवं प्रसाद वितरण
पूजा के पश्चात घर में दीपक जलाए जाते हैं। परिवार के सदस्यों एवं पड़ोसियों में मिठाइयां और प्रसाद वितरित किया जाता है। इस प्रकार पूरा वातावरण आनंद और उत्साह से भर जाता है।
यहां ध्यान देने योग्य है कि पूजा की विधि और परंपराओं में क्षेत्रीय तथा पारिवारिक भिन्नताएं हो सकती हैं।
6. धनतेरस का आधुनिक स्वरूप एवं चुनौतियां
वर्तमान समय में धनतेरस का स्वरूप काफी बदल गया है। पहले यह पर्व मुख्यतः धार्मिक आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा हुआ था, लेकिन अब इसमें बाजारवाद और उपभोक्तावाद का प्रभाव भी दिखाई देने लगा है।
आज लोग इस अवसर पर महंगे आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन तथा अन्य विलासिता की वस्तुएं खरीदते हैं। विज्ञापनों और बाजार की प्रतिस्पर्धा के कारण कभी-कभी लोग अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं।
ऐसी स्थिति में हमें धनतेरस के मूल संदेश को समझना चाहिए। धन का अर्थ केवल सोना-चांदी या भौतिक संपत्ति नहीं है, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य, ज्ञान, संस्कार, संतोष और पारिवारिक सुख भी वास्तविक धन हैं।
इसलिए धनतेरस को दिखावे और अनावश्यक खर्च के स्थान पर सादगी, स्वदेशी भावना, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सहयोग के साथ मनाना चाहिए।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि धनतेरस भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण एवं बहुआयामी पर्व है। इसकी ऐतिहासिकता पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी है, धार्मिक महत्ता भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, कुबेर और यमराज की उपासना में निहित है तथा सांस्कृतिक महत्ता पारिवारिक एकता, सामाजिक सद्भाव और लोकपरंपराओं के संरक्षण में दिखाई देती है।
वर्तमान समय में इस पर्व की सबसे बड़ी प्रासंगिकता यह है कि यह हमें धन के साथ स्वास्थ्य, समृद्धि के साथ संतोष और भौतिक विकास के साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
वास्तव में धनतेरस का संदेश है कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है, संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है और सद्भावपूर्ण जीवन सबसे बड़ी समृद्धि है। यदि हम इस पर्व को उसके वास्तविक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक अर्थों के साथ मनाएं, तो यह भारतीय समाज के लिए सदैव प्रेरणादायक बना रहेगा।



























































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