आधुनिक तकनीक के साथ कुशल मानव संसाधन विकसित करना समय की आवश्यकता : राजनाथ सिंह
•पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन में उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करने पर जोर
लखनऊ, 30 अगस्त। उत्तर प्रदेश में कौशल विकास, औद्योगिक आवश्यकताओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को लखनऊ के ताज पैलेस, विभूति खंड, गोमती नगर में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन-उत्तर प्रदेश सहभागिता का आयोजन किया गया। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में व्यावसायिक शिक्षा में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने तथा आईटीआई को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा मंत्रालय के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयंत चौधरी, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल मौजूद रहे।
इसके अलावा प्रशिक्षण महानिदेशालय के महानिदेशक दिलीप कुमार, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर, उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद समेत उद्योग जगत, प्रशिक्षण संस्थानों और शासन-प्रशासन के अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए।
कुशल मानव संसाधन के बिना तकनीक का पूरा लाभ संभव नहीं : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने की दिशा में कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश अत्याधुनिक मशीनें खरीद सकता है, लेकिन उन्हें कुशलता से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन जरूरी है। तकनीक और कुशल कार्यबल के समन्वय के बिना आधुनिक तकनीक का पूरा लाभ नहीं लिया जा सकता।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य की तकनीकों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनसांख्यिकीय शक्ति को जनसांख्यिकीय लाभांश और उत्पादक शक्ति में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं।
रोजगार से जुड़ना चाहिए प्रशिक्षण : जयंत चौधरी
जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी का नया मॉडल प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की खाई को समाप्त करना है।
उन्होंने उद्योगों से केवल सीएसआर तक सीमित नहीं रहने, बल्कि आईटीआई क्लस्टरों के विकास, संचालन और प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण ऐसा होना चाहिए, जो सीधे उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा हो और युवाओं के लिए अप्रेंटिसशिप से रोजगार तक स्पष्ट मार्ग तैयार करे।
यूपी में बड़ा बाजार और विशाल युवा शक्ति : कपिल देव अग्रवाल
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ा बाजार, विशाल युवा शक्ति और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध है। राज्य सरकार उद्योग जगत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के तहत 8 क्लस्टरों के 32 आईटीआई चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 7 क्लस्टर फिलहाल उद्योग सहयोग के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था को विकसित करने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, बड़ा बाजार और युवा मानव संसाधन की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए उद्योगों को सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी कर्मचारियों की बढ़ती मांग
सम्मेलन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, अशोक लेलैंड, एनएसडीसी, टीसीआईएल और पीटीसी समेत प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने एयरोस्पेस सिस्टम, जहाज निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, उन्नत वेल्डिंग, मेकाट्रॉनिक्स और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की बढ़ती मांग पर चर्चा की।
पीएम-सेतु के तहत 241 करोड़ तक निवेश का प्रावधान
पीएम-सेतु योजना के तहत एक हब आईटीआई और चार स्पोक आईटीआई वाले क्लस्टर में 241 करोड़ रुपये तक के निवेश का प्रावधान है। इसमें केंद्र सरकार का 50 प्रतिशत, राज्य सरकार का 33 प्रतिशत और उद्योग साझेदारों का 17 प्रतिशत योगदान प्रस्तावित है।
क्लस्टर संचालन के लिए प्रस्तावित एसपीवी व्यवस्था में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स को 51 प्रतिशत स्वामित्व दिया गया है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत होगी। वर्तमान में पांच राज्यों के सात क्लस्टरों में स्वीकृत उद्योग साझेदारी प्रस्ताव 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
‘शौर्य अकादमी’ के लिए एमओयू
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ‘शौर्य अकादमी’ की स्थापना की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने भारत सरकार के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।






















































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