Latest News / ताज़ातरीन खबरें

रक्षाबंधन 2026: आज भाई की कलाई पर सजेगा प्रेम और विश्वास का धागा, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

GGS NEWS 24 | विशेष लेख

भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है रक्षाबंधन

भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व आज शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सावन पूर्णिमा के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं भाई बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं।

रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि यह उस भावनात्मक रिश्ते का उत्सव है जिसमें बचपन की यादें, स्नेह, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प जुड़ा होता है।

इस वर्ष कब है रक्षाबंधन?

इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर 27 और 28 अगस्त की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम रहा, क्योंकि सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रही। पंचांग आधारित गणना के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है।

पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह लगभग 9:48 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब तक है?

पंचांग आधारित जानकारी के अनुसार इस वर्ष राखी बांधने का प्रमुख शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। यानी बहनों के पास भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए सुबह का विशेष मुहूर्त है।

विशेष ध्यान: मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए आजमगढ़, लखनऊ या अन्य शहरों में रहने वाले परिवार अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का मिलान कर सकते हैं।

भद्रा को लेकर क्या है स्थिति?

रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचने की परंपरा है। इस वर्ष उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार 28 अगस्त को भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी है, इसलिए सुबह के निर्धारित राखी मुहूर्त में भद्रा की बाधा नहीं बताई गई है।

राखी की थाली में क्या-क्या रखें?

रक्षाबंधन की पूजा के लिए थाली को पहले से तैयार कर लेना शुभ माना जाता है। थाली में मुख्य रूप से ये सामग्री रखी जा सकती है—

  • सुंदर राखी
  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • दीपक और घी/तेल
  • धूप या अगरबत्ती
  • मिठाई
  • पुष्प
  • पूजा के लिए जल
  • कलावा या रक्षा सूत्र
  • फल
  • भाई की आरती के लिए दीपक
  • सामर्थ्य के अनुसार उपहार

धार्मिक परंपरा में दूर्वा और कुछ स्थानों पर सरसों के दाने आदि का भी प्रयोग किया जाता है।

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

सबसे पहले भाई को स्वच्छ स्थान पर बैठाया जाता है। कई परिवारों में भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने की परंपरा है।

इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाती है। तिलक के बाद अक्षत लगाए जाते हैं। भाई की आरती उतारकर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है।

राखी बांधने के बाद बहन भाई को मिठाई खिलाती है और उसके सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना करती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सम्मान और सुरक्षा का संकल्प दोहराता है।

राखी बांधते समय मंत्र

परंपरा में राखी बांधते समय यह मंत्र बोला जाता है—

“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

इस मंत्र का भाव है कि जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम अपने संकल्प से कभी विचलित न होना।

राखी के साथ उपहार से ज्यादा जरूरी है भावना

आज के बदलते समय में रक्षाबंधन का स्वरूप भी बदल रहा है। बहनें भाइयों को पारंपरिक मिठाई और कपड़ों के साथ उनकी पसंद के उपहार दे रही हैं, वहीं भाई भी बहनों को उपहार, आभूषण, कपड़े या उनकी जरूरत की वस्तुएं दे रहे हैं।

लेकिन इस पर्व की असली खूबसूरती महंगे उपहारों में नहीं, बल्कि उस भावना में है जिसमें भाई-बहन एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े रहने का भरोसा देते हैं।

दूर रहने वाले भाई-बहन भी ऐसे मनाएं रक्षाबंधन

आज बड़ी संख्या में भाई-बहन पढ़ाई, नौकरी या व्यवसाय के कारण अलग-अलग शहरों में रहते हैं। ऐसे में वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना, ऑनलाइन उपहार भेजना या डाक/कूरियर से राखी भेजना भी रिश्ते की गर्माहट बनाए रखने का माध्यम बन गया है।

हालांकि संभव हो तो परिवार के साथ बैठकर रक्षाबंधन मनाने का आनंद ही अलग होता है।

रक्षाबंधन का संदेश

रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि रिश्ते केवल खून के संबंध से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी से मजबूत होते हैं। बहन की कलाई में बंधी राखी भाई को केवल उसकी रक्षा का वचन नहीं देती, बल्कि दोनों को एक-दूसरे के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलाती है।

आज जरूरत है कि रक्षाबंधन के इस पवित्र पर्व को केवल रस्म तक सीमित न रखा जाए। भाई बहन के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों का हमेशा ध्यान रखें और बहन भी अपने भाई के सुख-दुख में मजबूती से साथ खड़ी रहे।

रक्षाबंधन का असली अर्थ यही है—रिश्ते में प्रेम हो, व्यवहार में सम्मान हो और जीवन के हर मोड़ पर एक-दूसरे का साथ हो।

GGS NEWS 24 की ओर से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और स्नेह का यह पर्व आपके परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशियां लेकर आए।

समस्त देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।

— GGS NEWS 24


Leave a comment

Educations

Sports

Entertainment

Lucknow

Azamgarh