आजमगढ़: कृषि अपशिष्ट से कमाई का जरिया बनी हरित खाद, ₹4.60 लागत में ₹10 किलो बिक्री
आजमगढ़। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की पहल और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। जनपद में बीते तीन माह में सोशल मोबिलाइजेशन अभियान चलाकर 6,000 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर एक लाख महिलाओं को जोड़ा गया है, जिसके चलते आजमगढ़ प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंचा है।
इसी अभियान के तहत विकास खंड सठियांव की ग्राम पंचायत कस्बा सराय में माँ परम ज्योति स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कृषि अपशिष्ट को आय का साधन बनाने की अभिनव पहल शुरू की है।
गन्ने की राख और गोबर से तैयार हो रही हरित खाद
समूह की महिलाएं 50 प्रतिशत गन्ने की राख और 50 प्रतिशत 30 दिन पुराने गोबर में यूरिया, डीएपी और वेस्ट डिकंपोजर मिलाकर हरित खाद तैयार कर रही हैं। इस पहल से कृषि अपशिष्ट का उपयोग होने के साथ ही महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर भी पैदा हुआ है।
समूह के अनुसार, हरित खाद तैयार करने में ₹4.60 प्रति किलो की लागत आती है, जबकि इसे ₹10 प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। इस तरह समूह को ₹5.40 प्रति किलो का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।
किसानों और नर्सरियों में हो रही बिक्री
तैयार खाद को स्थानीय किसानों के अलावा एफपीओ और नर्सरियों में भी बेचा जा रहा है। इससे समूह की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो रहा है और कृषि अपशिष्ट का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने इस पहल को कृषि विविधीकरण और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण—तीनों को एक साथ जोड़ता है।
- सठियांव के कस्बा सराय में स्वयं सहायता समूह की पहल
- कृषि अपशिष्ट से तैयार हो रही हरित खाद
- ₹4.60 प्रति किलो लागत, ₹10 प्रति किलो बिक्री
- ₹5.40 प्रति किलो शुद्ध लाभ
- स्थानीय किसानों, FPO और नर्सरियों में बिक्री
- 3 माह में 6,000 नए समूह और 1 लाख महिलाएं अभियान से जुड़ीं
























































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