केवट ने गरीबी में भी निभाया मित्रता का धर्म : अतुल पाराशर
देवरिया कापरवार : कापरवार में चल रही नव दिवसीय श्रीराम कथा में कथा व्यास अतुल जी पाराशर ने भगवान श्रीराम और केवट के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में विशेष है, लेकिन केवट की भक्ति और समर्पण का स्थान अलग है।
उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण जब गंगा तट पर पहुंचे तो उन्हें नदी पार करनी थी। केवट ने प्रभु को नाव से गंगा पार कराने से पहले उनके चरण पखारने की इच्छा व्यक्त की। केवट ने कहा कि प्रभु के चरणों की धूल के स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गया था, इसलिए उसे डर है कि कहीं उसकी नाव भी नारी न बन जाए। केवट की सरल भक्ति और निश्छल प्रेम से भगवान श्रीराम प्रसन्न हुए और उसे चरण धोने की अनुमति दी।
अतुल जी पाराशर ने कहा कि राम और केवट का प्रसंग केवल भगवान और भक्त के संबंध को नहीं दर्शाता, बल्कि सच्चे प्रेम, विश्वास और मित्रता का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि जीवन की लंबी यात्रा में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में केवट भैया जैसा मित्र होना चाहिए, जो गरीबी और विपरीत परिस्थितियों में भी मित्रता का धर्म न भूले। सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में भी साथ खड़ा रहे।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इस अवसर पर लोकनाथ जायसवाल, फौजी बाबा, अमित मिश्रा, गोलू बाबा, रमेश मिश्रा और उमेश मद्धेशिया ने व्यास पीठ का पूजन-अर्चन कर आरती की। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
























































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