भाजपा छोड़ फिर सपा में लौटे पूर्व विधायक रामचंद्र चौधरी, बोले- पार्टी में बढ़ा भ्रष्टाचार और कार्यकर्ताओं की हो रही उपेक्षा
•पुत्र डॉ. अंगद चौधरी के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की चर्चा तेज, 2027 विधानसभा चुनाव पर टिकी निगाहें ।
कादीपुर (सुलतानपुर)। जिले की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व विधायक रामचंद्र चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर एक बार फिर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम से कादीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकार इसे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी और उनके पुत्र डॉ. अंगद चौधरी के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले रामचंद्र चौधरी वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया। वर्ष 2012 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरी बार विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की थी।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी से टिकट न मिलने पर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें वह राजनीतिक महत्व और जिम्मेदारी नहीं मिली जिसकी उन्हें अपेक्षा थी। पार्टी के भीतर उनकी भूमिका सीमित रहने से वह लगातार असहज महसूस कर रहे थे।
क्षेत्र में अपनी मिलनसार छवि और जनसंपर्क के लिए पहचाने जाने वाले रामचंद्र चौधरी का जनता के बीच आज भी अच्छा प्रभाव माना जाता है। संघर्षशील राजनीति और आम लोगों से सीधे संवाद की उनकी शैली ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है। यही कारण है कि सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद उनकी जनस्वीकार्यता बरकरार मानी जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2017 से भाजपा ने लगातार विधायक राजेश गौतम पर भरोसा जताया। राजेश गौतम ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनाव जीतकर पार्टी की झोली में सीट डाली। ऐसे में भाजपा संगठन और नेतृत्व की प्राथमिकताओं में रामचंद्र चौधरी को अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका।
इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि रामचंद्र चौधरी अब अपने पुत्र डॉ. अंगद चौधरी के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी में वापसी के पीछे 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति भी अहम कारण है। हालांकि सपा में उनके सामने चुनौती भी कम नहीं है। कादीपुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक भगेलू राम भी मजबूत दावेदार माने जाते हैं। भगेलू राम तीन बार बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी भी मजबूत राजनीतिक पकड़ है।
समाजवादी पार्टी में वापसी के बाद जब रामचंद्र चौधरी से भाजपा छोड़ने के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि भाजपा में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, प्रशासनिक अधिकारी निरंकुश होते जा रहे हैं तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही है, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है।
रामचंद्र चौधरी की सपा में वापसी से जहां समाजवादी पार्टी को क्षेत्र में नया राजनीतिक बल मिलने की उम्मीद है, वहीं भाजपा के लिए भी यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा संगठन कादीपुर सीट पर किस चेहरे पर दांव लगाता है और रामचंद्र चौधरी की वापसी का विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।



















































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