समता और विज्ञान आधारित भारतीय कैलेंडर का विमोचन, डॉ. रामविलास भारती की ऐतिहासिक पहल
घोसी।मऊ। भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती एवं भारतीय नववर्ष बुद्धाब्द 2571, आंबेडकर सन (आंबेडकराब्द) 135 की पूर्व संध्या पर एक ऐतिहासिक पहल के तहत समाजसेवी, इतिहासविद, गोल्ड मेडलिस्ट एवं राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ. रामविलास भारती द्वारा निर्मित भारतीय कैलेंडर का भव्य विमोचन एवं “कैलेंडरों की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का आयोजन ब्लॉक घोसी के धरौली स्थित विद्यालय में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महापुरुषों को पुष्प अर्पित एवं माल्यार्पण कर त्रिशरण पंचशील के साथ किया गया। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा कैलेंडर का विधिवत विमोचन किया गया। डॉ. रामविलास भारती द्वारा निर्मित यह भारतीय कैलेंडर बुद्धाब्द 2571, आंबेडकर सन (आंबेडकराब्द) 135 का कैलेंडर खगोलीय घटनाओं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं समतावादी-मानवतावादी विचारधारा पर आधारित भारत का एक अनूठा एवं ऐतिहासिक प्रयास है, जिसमें विभिन्न धर्मों—हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई एवं बौद्ध—की कालगणना को समाहित किया गया है। इसके अनुसार 14 अप्रैल से भारतीय नववर्ष बुद्धाब्द 2571, आंबेडकर सन (आंबेडकराब्द) 135 की शुरुआत होती है। मुख्य अतिथि पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक शिवचन्द राम ने कहा कि अब तक इतिहास में जितने भी कैलेंडर बने, वे राजाओं- महाराजाओं द्वारा निर्मित थे, किंतु पहली बार एक सामान्य शिक्षक द्वारा ऐसा ऐतिहासिक कार्य किया गया है। उन्होंने इसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन का दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी राम अवध राव ने की, जबकि अन्य प्रमुख अतिथियों में पूर्व मुख्य प्रबंधक मुखराम, सैनिक विनय कुमार, जितेन्द्र भारती एवं रामबहादुर उर्फ जब्बार आदि शामिल रहे।
इस कैलेंडर के निर्माणकर्ता डॉ. रामविलास भारती ने कहा कि विश्व की विभिन्न सभ्यताओं ने अपने-अपने कैलेंडर विकसित किए हैं, जो आज भी जीवन पद्धति का आधार हैं। ऐसे में समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, विज्ञान एवं तर्क पर आधारित मानवतावादी समाज के निर्माण हेतु आवश्यक है कि हम प्रगतिशील विचारकों एवं समाज सुधारकों के योगदान को कालगणना में स्थान दें। उन्होंने बताया कि यह कैलेंडर किसी भी दिन को शुभ या अशुभ नहीं मानता, बल्कि जीवन के निर्णय आवश्यकता, उपलब्धता एवं सामाजिक सहमति के आधार पर लेने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करते हुए इसे अपनाने और मानवतावादी संस्कृति को जीवनचर्या का आधार बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुखराम, जितेंद्र भारती, विनय कुमार, रामबहादुर, दयाशंकर यादव, हीरा, अवधेश कुमार, ओमप्रकाश रंजन, एडवोकेट सन्नी, जयनाथ निषाद, प्रधान डब्लू राजभर, डॉ. तेजभान, रामबदन, नंदा, दीपक, मनीषा, चिंता, रीना, संगीता, पूजा, अमीषा, सत्येंद्र, अजय कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।























































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