सच्चे मन से पुकार सुनकर प्रकट होते हैं भगवान
देवरिया लार :- जब धरती पर धर्म और अत्याचार बढ़ता है तब भगवान का अवतार किसी न किसी रूप में होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने कहा कि जब-जब होही धर्म की हानि, बाड़े असुर अधम अभिमानी, तब तब प्रभु धरी मनुज शरीरा हर ही सदा सज्जन भव पीरा।
भगवान सर्वत्र विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है। शतचंडी महायज्ञ चुरिया में श्रीराम कथा के तीसरे दिन आचार्य रवि प्रकाश मिश्रा ने भगवान के जन्म का रसपान कराते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते है। भगवान राम के जन्म की व्याख्या करते हुए पूर्व जन्म में मनु शतरूपा के वरदान के फल स्वरुप दशरथ व रानी कौशल्या के घर जन्म लिया। भगवान राम के जन्म की कथा सुन श्रद्धालु श्रोता झूम उठे।
























































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