मार्कण्डेय महादेव धाम: जहां महादेव ने यमराज को किया परास्त, अकाल मृत्यु से मुक्ति की है मान्यता
वाराणसी। वाराणसी से करीब 21 किलोमीटर दूर गाजीपुर मार्ग पर रजवाड़ी से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कैथी गांव का मार्कण्डेय महादेव मंदिर गंगा और गोमती नदियों के पवित्र संगम पर बसा एक प्रसिद्ध शिवधाम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान ऋषि मार्कण्डेय की कठोर तपस्या और भगवान शिव द्वारा उन्हें मृत्यु के भय से बचाने की पौराणिक कथा से जुड़ा है।
अल्पायु पुत्र के लिए मांगी थी भगवान शिव से प्रार्थना
पौराणिक कथा के अनुसार मृकण्डु ऋषि और उनकी पत्नी मरुद्मती संतानहीन थे। दोनों ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दो विकल्प दिए—पहला, सर्वगुण संपन्न लेकिन केवल 16 वर्ष की आयु वाला पुत्र और दूसरा, अल्पबुद्धि लेकिन दीर्घायु पुत्र।
ऋषि दंपती ने गुणवान और ज्ञानी पुत्र को चुना। उनके घर जन्मे बालक का नाम मार्कण्डेय रखा गया। जब मार्कण्डेय के 16 वर्ष की आयु पूरी होने का समय नजदीक आया तो उनके माता-पिता चिंतित रहने लगे। अपनी अल्पायु का रहस्य जानकर मार्कण्डेय ने उन्हें सांत्वना दी और गंगा-गोमती संगम तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी।
यमराज प्राण लेने पहुंचे तो प्रकट हुए महादेव
मान्यता है कि जब मार्कण्डेय की आयु 16 वर्ष पूरी हुई तो यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे। मार्कण्डेय भगवान शिव के शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे। यमराज ने जब अपना पाश फेंका तो वह मार्कण्डेय के साथ शिवलिंग पर भी पड़ गया।
भक्त और शिवलिंग पर आए इस संकट से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए और शिवलिंग से प्रकट होकर यमराज का सामना किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार महादेव ने यमराज को परास्त कर मार्कण्डेय को चिरंजीवी होने का वरदान दिया। इसी वजह से इस स्थान को अकाल मृत्यु से मुक्ति देने वाले पवित्र धाम के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है।
संतान प्राप्ति की भी है मान्यता
मार्कण्डेय महादेव धाम को लेकर श्रद्धालुओं में अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। संतान की इच्छा रखने वाले दंपती यहां पहुंचकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गंगा और गोमती के संगम पर स्थित होने के कारण इस धाम का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान मार्कण्डेय महादेव का जलाभिषेक एवं पूजन करते हैं।
आस्था और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा यह धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव की भक्ति, मृत्यु पर विजय और अटूट विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।


























































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