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कृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को प्रेम, करुणा व धर्म की प्रेरणा देती हैं : आचार्य राहुल पांडेय

•श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कृष्ण बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन, एकादशी व्रत और नंद बाबा के आदर्शों पर डाला प्रकाश
कादीपुर (सुलतानपुर)। स्थानीय क्षेत्र के एक गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा पंडाल में भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। व्यासपीठ पर विराजमान कथाव्यास आचार्य राहुल पांडेय (पाराशर जी) ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की लीलाओं का दिव्य रसपान कराया।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन या धार्मिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि वे मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। कथा के दौरान माखन चोरी, कालिया नाग दमन, पूतना वध तथा गोपियों के साथ भगवान के नटखट प्रसंगों का सजीव और भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन प्रसंगों के दौरान कथा पंडाल "जय श्रीकृष्ण" और "राधे-राधे" के जयघोष से गूंज उठा।
आचार्य राहुल पांडेय ने एकादशी व्रत के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एकादशी केवल अन्न त्याग का व्रत नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का पर्व है। उन्होंने कहा कि इस व्रत के पालन से व्यक्ति के भीतर सात्विक भावों का विकास होता है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा तथा समर्पण की भावना प्रबल होती है। यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रभावी माध्यम है।
कथाव्यास ने नंद बाबा के जीवन चरित्र का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नंद बाबा आदर्श पिता, समाजसेवी और धर्मनिष्ठ व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन प्रेम, त्याग और समर्पण भाव से किया जाना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के पालन-पोषण में उनका वात्सल्य और त्याग प्रत्येक अभिभावक के लिए प्रेरणास्रोत है।
प्रवचन के दौरान आचार्य ने भक्ति के नौ स्वरूपों—श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन—का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति के लिए अहंकार का त्याग और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण आवश्यक है तथा यही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम में क्षेत्र समेत दूर-दराज से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया। भजन-कीर्तन, आकर्षक सजावट और भक्तिमय वातावरण ने पूरे आयोजन को और अधिक दिव्य बना दिया।
आयोजकों के अनुसार कथा सप्ताह के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी प्रस्तावित है। कार्यक्रम में यजमान अशोक कुमार तिवारी एवं श्रीमती गायत्री देवी ने व्यासपीठ का पूजन एवं आरती की। इस अवसर पर कृष्ण कुमार तिवारी, गोले तिवारी, विवेक कुमार तिवारी, बालकृष्ण तिवारी, राम अधार जायसवाल, श्रीकांत उपाध्याय, देवी उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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