निजामाबाद में लगातार बिजली कटौती और जर्जर व्यवस्था पर समाजसेवियों ने उठाई आवाज, स्थायी समाधान की मांग
आजमगढ़। नगर पंचायत निजामाबाद में पिछले एक-दो महीनों से लगातार हो रही विद्युत कटौती और जर्जर विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजसेवियों ने गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नगर के अधिकांश वार्डों में पुराने और जर्जर बिजली के तार तथा खंभे अब तक नहीं बदले गए हैं, जिससे आए दिन आपूर्ति बाधित होती है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
समाजसेवी अरुण कुमार ने अपने परिवार एवं समाजसेविका कुलदीप कौर, समाजसेवी सौरभ सिंह, समाजसेविका कंचन कौर और समाजसेविका अनामिका कौर के साथ बताया कि वर्ष 2012 से वे बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और आमरण अनशन जैसे आंदोलन करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में भी विद्युत आपूर्ति को लेकर संघर्ष किया गया था, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे तथा नगर पंचायतों और नगर क्षेत्रों में 22 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई गई थी। इस संबंध में कई बार शासन और प्रशासन को ज्ञापन भेजे गए तथा विभिन्न स्तरों से आख्या भी प्राप्त हुई, लेकिन धरातल पर अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला।
समाजसेवियों का आरोप है कि बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे बिजली लोड के अनुरूप न तो नए पावर सबस्टेशन स्थापित किए गए और न ही ट्रांसफार्मरों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि की गई। साथ ही आधुनिक मशीनों और तकनीकी संसाधनों के अभाव में विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि समय रहते बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, जर्जर तारों और खंभों को बदला जाए, नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएं तथा आम नागरिकों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
समाजसेवी अरुण कुमार ने कहा कि वे हर वर्ष जिला प्रशासन से लेकर केंद्र और राज्य सरकार तक अपनी मांगों को लेकर पत्राचार करते हैं, लेकिन समाधान की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से जनहित में प्रभावी कार्रवाई करते हुए देश में बेहतर विद्युत व्यवस्था स्थापित करने की अपील की और उज्ज्वल भारत के निर्माण की कामना व्यक्त की।


















































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