जीव मात्र के कल्याण का साधन है भागवत कथा : आचार्य श्याम बिहारी
देवरिया।जनपद के सलेमपुर स्थित वार्ड नंबर एक भरौली के युगल सरकार मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य श्याम बिहारी द्वारा श्रद्धालुओं को भागवत कथा के महत्व का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि जीव मात्र के कल्याण का प्रमुख साधन भगवान की भक्ति है और भक्ति के मार्ग में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गोकर्ण जी ने भी जीव के कल्याण के लिए भागवत कथा श्रवण का महत्व बताया था। धुंधकारी ने भागवत कथा का श्रवण करके मोक्ष प्राप्त किया। नारद जी ने अपने पूर्व जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब वे दासी के पुत्र थे, तब उन्होंने भागवत कथा का श्रवण किया, जिससे उनके जीवन में परिवर्तन आया। यही उपदेश नारद जी ने वेदव्यास जी को दिया।
आचार्य ने बताया कि वेदव्यास जी ने इसी उपदेश के आधार पर श्रीमद्भागवत की रचना की, जिसमें 18 हजार श्लोक हैं। उन्होंने अपने पुत्र श्री शुकदेव जी को भागवत कथा सुनाई और बाद में श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को कथा सुनाई। जब राजा परीक्षित मृत्यु के निकट होने के कारण चिंतित और व्याकुल हुए, तब उन्होंने संतों के मध्य यह प्रश्न रखा कि मृत्यु समीप होने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए और जीव को सदैव क्या करना चाहिए। इसके उत्तर में श्री शुकदेव जी महाराज ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिसके श्रवण से उनका उद्धार हुआ।
उन्होंने कहा कि कलियुग में जीव मात्र के कल्याण के लिए श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, सदाचार और आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करती है।
इस अवसर पर कथा के यजमान हीरालाल गुप्ता एवं उनकी पत्नी आशा गुप्ता, समाजसेवी संजय श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, अखिलेश पांडेय, दुर्गेश पांडेय, सुनील ठठेरा, धनंजय बरनवाल सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।





















































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