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BRICS सम्मेलन 2026: नई दिल्ली से दुनिया को बड़ा संदेश, बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की निर्णायक भूमिका

•युद्ध, व्यापार, डॉलर, AI और ग्लोबल साउथ पर मंथन; ‘नई दिल्ली घोषणा’ बनी सम्मेलन का केंद्र

नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों, व्यापारिक टकराव, ऊर्जा संकट और बदलती आर्थिक व्यवस्था के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन वैश्विक राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में सामने आया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन का मूल संदेश था—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का सामना करना। भारत की अध्यक्षता के दौरान देशभर में BRICS से जुड़े 400 से अधिक कार्यक्रम और बैठकें 30 शहरों में आयोजित की गईं।

BRICS सम्मेलन ऐसे समय हुआ है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, अमेरिका-ईरान संघर्ष, व्यापारिक प्रतिबंधों, टैरिफ और आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता जैसी अनेक चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे माहौल में नई दिल्ली में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच पर आना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है BRICS?

BRICS मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नामों से बना समूह है। बाद के वर्षों में इसका विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी समूह में शामिल हुए। विस्तार के बाद BRICS की राजनीतिक और आर्थिक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो गई है।

BRICS का उद्देश्य विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना, वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की दिशा में काम करना है। AP के अनुसार विस्तारित BRICS लगभग आधी दुनिया की आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

2026 का BRICS सम्मेलन क्यों रहा खास?

2026 का सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इस बार BRICS के सामने केवल आर्थिक सहयोग का मुद्दा नहीं था। दुनिया में चल रहे युद्धों और भू-राजनीतिक तनाव ने सम्मेलन को एक बड़े कूटनीतिक मंच में बदल दिया।

भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख विचारों को आगे रखा—

Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability

यानी संकटों से निपटने की क्षमता, नवाचार, आपसी सहयोग और सतत विकास।

भारत की अध्यक्षता में BRICS के काम को राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच सहयोग—इन तीन व्यापक स्तंभों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

‘नई दिल्ली घोषणा’ बनी सबसे बड़ी उपलब्धि

सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में New Delhi Declaration यानी नई दिल्ली घोषणा शामिल रही। BRICS नेताओं ने संयुक्त रूप से घोषणा को स्वीकार किया।

घोषणा में मध्य-पूर्व की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए अधिकतम संयम बरतने और विवादों को संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि BRICS के भीतर अलग-अलग देशों के क्षेत्रीय और रणनीतिक हित कई मामलों में एक-दूसरे से अलग हैं। इसके बावजूद साझा घोषणा पर सहमति बनना भारत की कूटनीतिक क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।

मध्य-पूर्व के युद्ध पर BRICS का रुख

BRICS घोषणा में मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष और तनाव को लेकर चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने ऐसी कार्रवाई से बचने की अपील की जिससे स्थिति और खराब हो।

BRICS ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और बहुपक्षीय व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया।

इसका व्यापक संदेश यह है कि BRICS खुद को केवल आर्थिक समूह के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक संकटों पर सामूहिक आवाज उठाने वाले मंच के रूप में भी स्थापित करना चाहता है।

भारत ने दुनिया को क्या संदेश दिया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान कहा कि दुनिया में बढ़ते संघर्ष, महामारी, जलवायु आपदाएं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते।

भारत ने विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों के ‘weaponisation’ यानी रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल के खतरे की ओर ध्यान दिलाया।

मोदी ने BRICS देशों से सम्मेलन में लिए गए निर्णयों को केवल दस्तावेजों और बैठकों तक सीमित न रखने तथा उन्हें जमीन पर लागू करने पर जोर दिया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा फैसला

BRICS के स्तर पर संक्रामक बीमारियों के लिए एक Integrated Early Warning System विकसित करने पर सहमति बनी।

इसका उद्देश्य भविष्य में महामारी या संक्रामक रोगों के खतरे की जल्द पहचान करना और सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

कोरोना महामारी के अनुभव के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। BRICS का यह कदम भविष्य में महामारी संबंधी तैयारी को मजबूत कर सकता है।

डॉलर के विकल्प की दिशा में क्या हुआ?

BRICS के बारे में सबसे अधिक चर्चा अक्सर इस बात को लेकर होती है कि क्या समूह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कोई नई साझा मुद्रा शुरू करेगा।

2026 के सम्मेलन में तत्काल किसी साझा BRICS मुद्रा को लागू करने के बजाय अधिक व्यावहारिक रास्ते पर जोर दिखाई दिया। सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश, सीमा-पार भुगतान व्यवस्था तथा विभिन्न भुगतान प्रणालियों की interoperability बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखने की बात कही।

इसका अर्थ यह है कि BRICS फिलहाल डॉलर को एक झटके में हटाने की बजाय अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान तंत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

वैश्विक व्यापार में टैरिफ पर आपत्ति

BRICS घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक बाधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

समूह का कहना है कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करती हैं।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक टकराव का असर विकासशील देशों पर भी पड़ता है। BRICS ने अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग

BRICS ने संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से UN Security Council में सुधार की आवश्यकता दोहराई।

समूह का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक संस्थाओं में आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

विकासशील देशों, खासकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका बढ़ाने की मांग BRICS की लंबे समय से चली आ रही प्राथमिकताओं में शामिल है। नई दिल्ली घोषणा ने इस रुख को फिर से मजबूती दी।

Global South की आवाज मजबूत करने की कोशिश

BRICS का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश Global South की आवाज को मजबूत करना है।

विकासशील देशों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी आर्थिक ताकत के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है।

भारत ने BRICS के माध्यम से विकासशील देशों की चिंताओं—खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त, विकास वित्त, तकनीक और व्यापार—को वैश्विक मंच पर अधिक मजबूती से रखने की कोशिश की।

AI और नई तकनीक पर बढ़ता जोर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Artificial Intelligence अब BRICS के आर्थिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

AI को आर्थिक विकास, उत्पादकता और नवाचार का माध्यम मानते हुए इसके सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार इस्तेमाल की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

भारत की अध्यक्षता में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाया गया। BRICS Science and Research Repository तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में भी प्रगति का उल्लेख किया गया।

अंतरिक्ष सहयोग भी एजेंडे में

BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी नई दिशा देने की कोशिश हुई।

BRICS Remote Sensing Satellite Constellation में सहयोग की प्रगति को रेखांकित किया गया। इसके अलावा BRICS Space Council से जुड़े ढांचे पर भी काम आगे बढ़ाने की बात सामने आई।

अंतरिक्ष में मलबे को कम करने, अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिक टिकाऊ बनाने और वैज्ञानिक जानकारी साझा करने जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में हैं।

युद्ध और व्यापारिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति तथा खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। BRICS देशों ने ऊर्जा सहयोग, खाद्य सुरक्षा और अधिक मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत के लिए यह क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश एक साथ ऊर्जा सुरक्षा, कृषि विकास और आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन पर सहयोग

BRICS के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को भी प्रमुख स्थान मिला।

विकासशील देशों के लिए चुनौती यह है कि वे आर्थिक विकास की गति को बनाए रखते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटें।

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय तकनीक, जलवायु वित्त और सतत विकास को BRICS सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

MSME, स्टार्टअप और रोजगार

BRICS के आर्थिक एजेंडे में छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप और युवाओं की भूमिका भी बढ़ रही है।

व्यापारिक सहयोग, कौशल विकास, उद्यमिता और महिला नेतृत्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहलें की गईं।

नई दिल्ली घोषणा में BRICS Business Forum, Women's Business Alliance और BRICS Solutions Awards जैसी पहलों का उल्लेख किया गया।

महिलाओं की भागीदारी पर जोर

BRICS ने महिला नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना।

महिलाओं की वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

यह दृष्टिकोण BRICS के आर्थिक विकास को केवल GDP तक सीमित न रखकर सामाजिक विकास से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

मोदी-शी जिनपिंग-पुतिन की मौजूदगी ने बढ़ाया सम्मेलन का महत्व

नई दिल्ली सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने सम्मेलन को विशेष महत्व दिया।

भारत-चीन संबंधों, रूस-यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक रणनीतिक समीकरणों के संदर्भ में इन नेताओं की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रही।

BRICS के मंच ने भारत को एक साथ चीन, रूस और अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद का अवसर दिया।

भारत-चीन संबंधों के लिए भी अहम मंच

BRICS सम्मेलन भारत और चीन के बीच संवाद के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।

दोनों देशों के बीच सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं, लेकिन आर्थिक और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की आवश्यकता दोनों के सामने है।

ऐसे में BRICS ने दोनों देशों को व्यापक वैश्विक एजेंडे के बीच बातचीत का अवसर प्रदान किया।

रूस के साथ भारत का संतुलन

रूस भारत का लंबे समय से महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को जटिल बनाया है।

भारत ने BRICS मंच पर संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर देते हुए अपनी पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा।

नई दिल्ली के लिए चुनौती यह है कि वह रूस के साथ संबंध बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ अपने बढ़ते आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को भी संतुलित रखे।

BRICS अब सिर्फ आर्थिक संगठन नहीं

BRICS की बदलती भूमिका का सबसे बड़ा संकेत यही है कि यह समूह अब केवल व्यापार और निवेश की चर्चा तक सीमित नहीं है।

अब इसके एजेंडे में—

  • वैश्विक सुरक्षा
  • युद्ध और संघर्ष
  • आतंकवाद
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • खाद्य सुरक्षा
  • AI
  • साइबर एवं डिजिटल तकनीक
  • अंतरिक्ष
  • जलवायु परिवर्तन
  • स्वास्थ्य सुरक्षा
  • स्थानीय मुद्राओं में व्यापार
  • वैश्विक संस्थाओं में सुधार

जैसे मुद्दे शामिल हैं।

यानी BRICS धीरे-धीरे एक व्यापक राजनीतिक-आर्थिक मंच का स्वरूप ले रहा है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

भारत के लिए BRICS की सफलता कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।

पहला—भारत को Global South की आवाज मजबूत करने का अवसर मिलता है।

दूसरा—भारत चीन और रूस जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ संवाद बनाए रख सकता है।

तीसरा—स्थानीय मुद्रा में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियां भारत को भविष्य में वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने में मदद कर सकती हैं।

चौथा—AI, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारतीय उद्योग और शोध संस्थानों के लिए अवसर पैदा कर सकता है।

पांचवां—BRICS के विस्तार के कारण भारत की कूटनीतिक पहुंच एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और अन्य विकासशील क्षेत्रों तक और मजबूत हो सकती है।

BRICS के सामने चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि BRICS का विस्तार इसकी ताकत है, लेकिन यही विस्तार इसकी चुनौती भी बन सकता है।

सदस्य देशों के राजनीतिक हित अलग-अलग हैं। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद है। रूस पश्चिमी देशों के साथ गंभीर टकराव में है। ईरान और मध्य-पूर्व के अन्य देशों के बीच भी जटिल क्षेत्रीय समीकरण हैं।

ऐसे में हर मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं होगा।

नई दिल्ली घोषणा पर सहमति बनना इसलिए महत्वपूर्ण है, लेकिन भविष्य में BRICS को अपनी घोषणाओं को वास्तविक नीतियों और परियोजनाओं में बदलना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

2027 में चीन संभालेगा अध्यक्षता

भारत की 2026 की अध्यक्षता के बाद 2027 में चीन BRICS की अध्यक्षता संभालेगा और अगला BRICS शिखर सम्मेलन चीन में आयोजित किया जाएगा।

इस बदलाव का अर्थ यह भी है कि आने वाले वर्ष में BRICS के एजेंडे में चीन की प्राथमिकताओं का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।

 क्या BRICS नई वैश्विक व्यवस्था की नींव बन रहा है?

नई दिल्ली BRICS सम्मेलन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि दुनिया अब एकध्रुवीय व्यवस्था से आगे बढ़कर अधिक बहुध्रुवीय स्वरूप की ओर बढ़ रही है।

BRICS इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। हालांकि इसे अभी यूरोपीय संघ जैसे पूर्ण आर्थिक-राजनीतिक संघ के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, AI, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 2026 का सम्मेलन इसलिए खास रहा क्योंकि नई दिल्ली ने BRICS को केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक सहयोगी तंत्र के रूप में प्रस्तुत किया।

अब असली परीक्षा घोषणाओं की नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन की होगी।

अगर BRICS अपने फैसलों को जमीन पर लागू करने में सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक बन सकता है। सम्पादक चंद्रशेखर मौर्य


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