'प्रेमचंद को गरीब साबित करने की कोशिश ऐतिहासिक तथ्य नहीं, मिथक है'
•जनवादी लेखक संघ ने मनाई प्रेमचंद जयंती, वक्ताओं ने साहित्यकार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर डाला प्रकाश ।
सुलतानपुर। जनवादी लेखक संघ की ओर से गुरुवार को पर्यावरण पार्क में हिंदी साहित्य के अमर कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने भारतीय साहित्य को नई दिशा देने का काम किया। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की आवाज बनाया।
मुख्य वक्ता राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन अत्यंत सादा था, लेकिन उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर या लाचार लेखक के रूप में प्रस्तुत करना ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि मजदूरों और किसानों के पक्षधर लेखक होने के कारण समय के साथ उनके निजी जीवन पर भी कृत्रिम रूप से गरीबी का आवरण चढ़ा दिया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के आम जन की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी तथा साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राम प्यारे प्रजापति ने कहा कि प्रेमचंद संवेदनशील, राष्ट्रभक्त और संघर्षशील साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक न्याय, मानवीय मूल्यों और प्रगतिशील चिंतन का सशक्त स्वर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अपने समय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि आज भी समाज को दिशा देने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकपूर शुक्ल ने कहा कि 31 जुलाई का दिन भारतीय इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन अमर शहीद ऊधम सिंह का बलिदान दिवस तथा महान पार्श्वगायक मुहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि भी होती है। उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के योगदान का स्मरण करना भी समाज का दायित्व है।
कार्यक्रम का संचालन बृजेन्द्र नाथ तिवारी ने किया। इस दौरान प्रियव्रत पाण्डेय 'अक्षत', अजय पाण्डेय, विपिन कुमार और राजेश कुमार त्रिपाठी सहित अन्य वक्ताओं ने भी प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी सामाजिक विषमताओं, मानवीय संवेदनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने की प्रेरणा देती हैं।
समारोह के अंत में उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
























































Leave a comment