श्री कृष्ण जन्म कथा सुनकर श्रद्धालु हुए हर्षित
देवरिया।स्थानीय रूद्रपुर टैक्सी स्टैंड पर चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस पर वृंदावन धाम से पधारे हुए आचार्य राघवेंद्र शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा में सूर्यवंश का वर्णन ,अम्बरीष चरित्र,युवनाश्व, मान्धाता, सगर, चरित्र,अंशुमान, दिलीप का गंगा अवतरण का प्रयास असफल होना, उनके पुत्र भगीरथ द्वारा शत्रुघ्नअन्य लीला, चन्द्र वंश का वर्णन करते हुए कृष्ण जन्मोत्सव की कथा को विस्तार से सुनाया उन्होंने कहा कि भगवान वासुदेव और देवकी के सामने जब चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए तो देवकी जी ने पूछा की प्रभु आपने इतना विलंब क्यों किया जिस पर भगवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि पूर्व जन्म में जब आप करके के रूप में थे तो 14 वर्षों के लिए मैं आपसे दूर रहा इसलिए मुझे आपके पास आने में 14 वर्ष का समय व्यतीत हो गया फिर भगवान चतुर्भुज त्याग कर नन्हा सा बालक बनकर देवकी की गोद में स्थापित हुई जिस तरह से कौशल्या के समक्ष चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए थे और कौशल्या जी के प्रार्थना करने पर बालक बन गए ठीक उसी प्रकार माता देवकी के प्रार्थना पर भगवान बालक बन गए प्रभु श्री कृष्ण के जन्म लेते हैं कंस के कारागार में उपस्थित सभी द्वारपाल गहरी निद्रा में सो गए वासुदेव और देवकी के हाथों की हथकड़ी और बेड़ी टूट कर गिर गई और वासुदेव जी ने नन्हे बालक कृष्ण को सूप में रखकर नंद जी के घर पहुंचा दिया भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनकर श्रोता हर्षित हो उठे पूरे पंडाल में जय श्री राम जय श्री कृष्ण गूंज उठा भगवान कृष्ण के बाल रूप की झांकी प्रस्तुत की गई जो श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कथा के दौरान विवेकानंद तिवारी, उषा तिवारी, नित्यानंद तिवारी, शिवानंद तिवारी, अखिलानंद तिवारी, संपूर्णानंद तिवारी,कृपानंद तिवारी सहित अन्य श्रद्धालु जन काफी संख्या में उपस्थित है।


























































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