माता-पिता भाई खोने के बाद अनाथ बेटियों की, मदद के लिए लोगों के बढ़े हाथ
देवरिया भागलपुर, मईल थाना क्षेत्र अंतर्गत इशारू गांव की पांच अनाथ बेटियों की मार्मिक कहानी सुनकर बलिया दक्षिण निवासी संतलाल विश्वकर्मा का मन द्रवित हो उठा। बच्चियों की कुशलक्षेम जानने की इच्छा उन्हें उनके घर तक ले गई। उन्होंने पांचों बहनों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और अपनी पेंशन से बचाए गए पैसों में से पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही भविष्य में भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार मदद करते रहने का भरोसा दिलाया। संतलाल विश्वकर्मा रेलवे में फाइटर के पद पर कार्यरत रहे हैं और लखनऊ से सेवानिवृत्त हुए हैं। भागलपुर निवासी उनके साथी छोटू प्रसाद गौड़ के साथ क्षेत्र में उनका अक्सर आना-जाना रहता है। इसी दौरान उन्हें इशारू गांव की उन पांच बहनों के बारे में जानकारी मिली, जिन्होंने कम उम्र में ही अपने माता-पिता और भाई को खो दिया। बच्चियों की स्थिति के बारे में सुनकर संतलाल काफी भावुक हुए। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि परिवार के एक-एक सदस्य कुछ ही वर्षों के अंतराल में बच्चियों का साथ छोड़ गए, तो उन्हें काफी पीड़ा हुई। इसके बाद उन्होंने स्वयं बच्चियों से मिलने और उनका हाल जानने का निर्णय लिया।
छोटू प्रसाद गौड़ के साथ इशारू गांव पहुंचे संतलाल ने बच्चियों से बातचीत की और उनकी जरूरतों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि किसी असहाय की मदद करना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उसे यह भरोसा देना भी है कि कठिन समय में समाज उसके साथ खड़ा है। इशारू की इन पांच बहनों की कहानी सामने आने के बाद क्षेत्र के कई लोग उनकी सहायता के लिए आगे आए हैं।अलग-अलग लोग अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करा रहे हैं। समाज के लोगों के इस सहयोग से बच्चियों को आगे बढ़ने का सहारा मिल रहा है। संतलाल ने कहा कि समाज में आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं, जो जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। जरूरत केवल उनके दर्द को समझकर उनके पास पहुंचने की है।




























































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