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भरणपोषण के आदेश पर कार्यवाही न होने से नाराज होकर न्यायालय ने घोसी के तत्कालीन थानाध्यक्ष का वेतन रोकने का दिया आदेश।

घोसी। मऊ। परिवार न्यायालय मऊ द्वारा कई बार महिला को भरणपोषण के आदेश का अनुपालन न करने और वारंट की तामील न करने को लेकर घोसी कोतवाली के तत्कालीन थानाध्यक्ष के वेतन रोकने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया है। इसको लेकर हड़कम की स्थिति बनी हुई है।
घोसी कोतवाली के जमालपुर विक्कमपुर निवासी मो अयूब की शादी भातकोल मोहम्दाबाद निवासिनी आयशा खातून के साथ हुआ था। आयशा खातून द्वारा दहेज आदि को लेकर प्रताड़ित करने और खर्चा न देने को लेकर आयशा खातून ने परिवार न्यायालय में एक मुकदमा किया है। इस पर न्यायालय ने मो अयूब को अपनी पत्नी आयशा खातून को भारपोषण के रूप में रु दो हजार एवं रु तीन हजार पांच सौ माहवार देने का आदेश दिया गया था। परंतु पति मो अयूब द्वारा आदेश की अवहेलना करते हुए 16/5/2018 से 19/3/2020तक 22माह का रू45500 नहीं देने पर न्यायालय द्वारा कोतवाली घोसी को सम्बन्धित धनराशि दिलाने और न देने पर गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के आदेश पर मो अयूब द्वारा अपनी पत्नी को रु 7000दिया गया। उसके बाद कोई भुगतान नहीं किया गया। पत्नी आयशा द्वारा न्यायालय के संज्ञान में लाने पर परिवारन्यायालय द्वारा घोसी कोतवाली पुलिस को कई बार भरपोषण की धनराशि को दिलाने और वारंट की तामील न होने पर परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश द्वारा कड़ा रुख अपनाते हुए अपने 27जून के आदेश में एसपी को आदेश दिया की मेरे न्यायालय द्वारा जारी आदेशिकाएं न्यायालय की सम्पत्ति होती है इसको रोकना या अपने पास रखने का अधिकार किसी को नहीं है। यह एक घोर लापरवाही एवं अवज्ञा है। इस लिए रिकवरी वारंट का तामिला जल्द से जल्द सम्बन्धित थाना द्वारा कराने के साथ सम्बन्धित थानाध्यक्ष का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया जाए। इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हड़कम की स्थिति बनी हुई है। इस सम्बन्ध में कोतवाल रविन्द्रनाथ राय ने बताया कि वेतन रोकने का मामला संज्ञान में है,। सम्बन्धित अधिकारी का स्थानांतरण हो गया है। न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जाएगा।


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