आजमगढ़ में ओवैसी का सियासी शंखनाद, 2027 के चुनाव से पहले सपा को चुनौती; मुस्लिमों की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाने की तैयारी
कोटिला/आजमगढ़। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की आजमगढ़ में जनसभा को पूर्वांचल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रविवार, 11 अक्टूबर को कोटिला के पास सिरसल क्लब ग्राउंड में आयोजित इस जनसभा को लेकर पार्टी की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, AIMIM की ओर से सभा में एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का दावा किया गया था। पार्टी के जिला अध्यक्ष नदीम अहमद ने बताया था कि कार्यक्रम शाम चार बजे से शुरू होना था और ओवैसी के करीब छह बजे पहुंचने का कार्यक्रम था।
मुस्लिमों की राजनीतिक हिस्सेदारी बना बड़ा मुद्दा
उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही AIMIM लगातार मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक हिस्सेदारी, शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दे उठा रही है। पार्टी का कहना है कि मुस्लिम समुदाय को केवल चुनाव के दौरान वोट देने वाले समूह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
निजी एजेंसी की 4 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ओवैसी ने बहराइच की सभा में मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक समझे जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा था। हालांकि, इन बयानों को आजमगढ़ की सभा का प्रत्यक्ष बयान नहीं माना जाना चाहिए।
सपा और अखिलेश यादव पर पहले भी साध चुके हैं निशाना
असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर समाजवादी पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाते रहे हैं, AIMIM नेतृत्व ने सपा पर मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का लाभ लेने, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी पर्याप्त रूप से नहीं देने का आरोप लगाया है।
पार्टी ने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभावना भी उठाई थी। AIMIM नेताओं के मुताबिक, अगर गठबंधन की सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी अपना अलग राजनीतिक विकल्प तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
आजमगढ़ में सपा के सामने क्या है चुनौती?
आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र रहा है। GGS NEWS 24 की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की सभी दस सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ और लालगंज दोनों सीटों पर भी सपा ने जीत हासिल की थी।
ऐसे राजनीतिक समीकरणों के बीच ओवैसी की जनसभा को AIMIM की संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस सभा का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में पार्टी के संगठन, उम्मीदवारों और गठबंधन की स्थिति पर निर्भर करेगा।
आजमगढ़ की इस जनसभा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच AIMIM की राजनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी पूर्वांचल में अपना जनाधार कितना बढ़ा पाती है और विपक्षी दलों के साथ गठबंधन को लेकर आगे क्या फैसला करती है।

























































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