जल जीवन मिशन की खराब टंकियों पर ईडी की नजर, मंजूरी से भुगतान तक मांगा पूरा हिसाब
लखनऊ। जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना में खराब हुई पानी की टंकियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। ईडी ने टंकियों की स्वीकृति से लेकर निर्माण, गुणवत्ता जांच, कमीशनिंग और भुगतान तक का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। इसके साथ ही वर्ष 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में तैनात रहे करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल से संबंधित कार्यों की जानकारी भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
ईडी ने जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को 20 कॉलम का एक विस्तृत प्रारूप भेजकर प्रत्येक ऐसी टंकी का अलग-अलग विवरण मांगा है, जो निर्माण या उपयोग के दौरान विफल हुई। हालांकि, मांगी गई पूरी जानकारी अभी ईडी को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
किन टंकियों की मांगी गई जानकारी?
ईडी ने उन टंकियों को शामिल किया है, जो कमीशनिंग से पहले या बाद में, परीक्षण अथवा उपयोग के दौरान गिर गईं, फट गईं, उनमें दरार या रिसाव हुआ, झुक गईं, धंस गईं अथवा असुरक्षित या अनुपयोगी घोषित की गईं। जिन टंकियों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया गया है, उनका विवरण भी मांगा गया है।
मंजूरी और टेंडर से लेकर डिजाइन तक की जांच
प्रत्येक मामले में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, डीपीआर तथा स्वीकृत संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग उपलब्ध कराने को कहा गया है। संबंधित कार्यादेश पाने वाली फर्म का नाम-पता, पंजीकरण, अनुबंध मूल्य, निर्धारित अवधि और वास्तविक रूप से कार्य पूरा होने की तारीख भी मांगी गई है।
निर्माण शुरू होने से पहले जारी स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, मृदा परीक्षण रिपोर्ट और मिक्स डिजाइन रिपोर्ट भी जांच का हिस्सा हैं।
गुणवत्ता जांच और सामग्री की रिपोर्ट भी तलब
ईडी ने तृतीय पक्ष निरीक्षण यानी टीपीआई एजेंसी की रिपोर्ट, गुणवत्ता ऑडिट लॉग तथा निर्माण में इस्तेमाल सीमेंट, एग्रीगेट और प्रबलन इस्पात की सामग्री परीक्षण रिपोर्ट भी मांगी है।
इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।
भुगतान की पूरी बैंकिंग जानकारी मांगी
भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड में रनिंग अकाउंट (आरए) बिल और अंतिम बिल के साथ ठेकेदार, उपठेकेदार और टीपीआई एजेंसी के बैंक खातों का विवरण भी मांगा गया है। इसमें खाताधारक का नाम, खाता संख्या, बैंक और शाखा जैसी जानकारी शामिल है।
ईडी ने यह भी पूछा है कि भुगतान जारी करने से पहले टंकी की संरचनात्मक अखंडता का सत्यापन किस अधिकारी ने किया था। इसके लिए संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता के नाम एवं पदनाम मांगे गए हैं।
पोर्टल पर अपलोड फोटो भी जांच के दायरे में
जल जीवन मिशन के पोर्टल पर अपलोड की गई प्रगति और पूर्णता संबंधी तस्वीरें भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। खास तौर पर वे तस्वीरें मांगी गई हैं, जिनके आधार पर संबंधित कार्य के लिए भुगतान जारी किया गया था।
टंकी विफल होने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
ईडी ने प्रत्येक टंकी के विफल होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा मांगा है। इसमें अभियंताओं, ठेकेदारों और टीपीआई एजेंसियों के खिलाफ निलंबन, कारण बताओ नोटिस, ब्लैकलिस्टिंग या अन्य विभागीय कार्रवाई का विवरण शामिल है।
इसके अलावा आदेश संख्या और तारीख, लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार से संबंधित एफआईआर, जांच रिपोर्ट, अनुमानित वित्तीय नुकसान और की गई वसूली की जानकारी भी मांगी गई है।
20 कॉलम में दर्ज होगी हर टंकी की पूरी कहानी
ईडी के प्रारूप में प्रत्येक टंकी की अलग पंक्ति में जनपद, विकासखंड, ग्राम पंचायत, योजना, क्षमता, लागत, कार्यादेश, ठेकेदार, टीपीआई एजेंसी, निर्माण व कमीशनिंग की तारीख, विफलता की तारीख और कारण, कुल भुगतान, अंतिम भुगतान की तारीख तथा संबंधित अभियंताओं की जानकारी दर्ज करनी है।
इसके साथ एफआईआर, विभागीय कार्रवाई, वसूली और टंकी की वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख किया जाना है।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईडी ने केवल खराब टंकियों की सूची नहीं मांगी है, बल्कि स्वीकृति से लेकर निर्माण, गुणवत्ता सत्यापन और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजी एवं वित्तीय रिकॉर्ड तलब किया है। जांच के आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट होगा कि किन मामलों में तकनीकी खामी, लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है।
























































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