Rajesh Exports मामला: ₹15.15 लाख करोड़ का कथित घोटाला, आखिर पूरी कहानी क्या है?
भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में शायद ही कभी कोई ऐसा मामला सामने आया हो, जिसमें ₹15.15 लाख करोड़ जैसी विशाल राशि पर सवाल उठे हों। जून 2026 में भारतीय बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने ज्वेलरी और गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी Rajesh Exports और उसके चेयरमैन Rajesh Mehta के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए।
राजेश मेहता कौन हैं?
राजेश मेहता भारत के प्रमुख कारोबारी हैं और राजेश एक्सपोर्ट्स के संस्थापक, चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक (CMD) हैं। कंपनी सोने के आयात, रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्माण के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रही है। इसकी स्विस सहायक कंपनी Valcambi SA दुनिया की बड़ी गोल्ड रिफाइनर कंपनियों में गिनी जाती है।
मामला शुरू कैसे हुआ?
SEBI को कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में कई वर्षों से विसंगतियां दिखाई दीं। जांच के दौरान नियामक ने आरोप लगाया कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़े राजस्व (Revenue) को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। SEBI के अनुसार लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की राशि से संबंधित राजस्व का सत्यापन नहीं हो पाया और यह कंपनी द्वारा दिखाए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8% हिस्सा था।
SEBI के मुख्य आरोप
SEBI की अंतरिम जांच में कई गंभीर बिंदु सामने आए:
1. ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व में कथित गड़बड़ी
नियामक का कहना है कि कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से Valcambi SA, से जुड़े राजस्व को इस तरह प्रस्तुत किया जिससे कंपनी का कारोबार वास्तविकता से कहीं अधिक बड़ा दिखाई दिया।
2. विदेशी इकाइयों के वित्तीय विवरणों पर सवाल
SEBI के अनुसार कंपनी की 97% से 99% तक आय विदेशी सहायक कंपनियों से दिखाई गई, लेकिन इन इकाइयों के वित्तीय विवरणों का पर्याप्त खुलासा नहीं किया गया।
3. फंड डायवर्जन के आरोप
जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनी के कुछ धन का उपयोग प्रमोटर से जुड़े लेन-देन में किया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग ₹339 करोड़ के ट्रांसफर पर भी सवाल उठाए गए।
4. कॉर्पोरेट गवर्नेंस में खामियां
SEBI ने बोर्ड अनुमोदन, ऑडिट प्रक्रिया और वित्तीय खुलासों में गंभीर कमियों की ओर संकेत किया है।
SEBI ने क्या कार्रवाई की?
- राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से रोका गया।
- कंपनी और उसके प्रमोटरों पर बाजार से संबंधित कई प्रतिबंध लगाए गए।
- नए फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए गए।
- कंपनी को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया गया।
कंपनी का पक्ष
राजेश मेहता और राजेश एक्सपोर्ट्स ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
उनका कहना है कि:
- SEBI ने केवल कुछ "स्टैंडअलोन" आंकड़ों को देखा।
- समूह के "कंसोलिडेटेड" (Consolidated) राजस्व को सही तरह से नहीं समझा गया।
- Valcambi SA द्वारा वर्षों में हजारों टन सोने का रिफाइनिंग कार्य किया गया, इसलिए बड़ा राजस्व स्वाभाविक है।
- कंपनी द्वारा घोषित वित्तीय आंकड़े सही हैं।
शेयर बाजार पर असर
SEBI की कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। निवेशकों में चिंता बढ़ी और कंपनी का शेयर लोअर सर्किट तक पहुंच गया।
क्या यह भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला है?
राशि के आधार पर देखा जाए तो ₹15.15 लाख करोड़ का आंकड़ा भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में सामने आए सबसे बड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामलों में से एक है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि:
- अभी जांच जारी है।
- SEBI का आदेश अंतरिम (Interim) है।
- अदालत या अंतिम नियामकीय निर्णय अभी नहीं आया है।
- आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है।निष्कर्ष
राजेश एक्सपोर्ट्स प्रकरण फिलहाल भारत के सबसे चर्चित कॉर्पोरेट मामलों में शामिल हो चुका है। SEBI का दावा है कि कंपनी ने वर्षों तक अपने राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जबकि कंपनी इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रही है। आने वाले महीनों में फॉरेंसिक ऑडिट, नियामकीय जांच और संभावित न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि ₹15.15 लाख करोड़ का यह मामला वास्तव में इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड साबित होता है या फिर वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या को लेकर पैदा हुआ विवाद है।



























































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