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अमित शाह बोले- 8,526 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 7,328 के खोले गए बैंक खाते

•नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर सरकार का जोर, पीएम आवास से लेकर रोजगार और कौशल विकास तक कई योजनाओं का दावा

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामान्य दिव्यांगजनों और नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति के साथ-साथ हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख किया।

8,526 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

केंद्रीय गृह मंत्री के अनुसार, अब तक करीब 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कई लोगों के पास बैंक खाते तक नहीं थे।

सरकार की ओर से ऐसे 7,328 लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए, ताकि उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता और पुनर्वास संबंधी लाभ सीधे बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराए जा सकें।

1,620 लोगों को मिली इनामी राशि

अमित शाह ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों में 1,620 लोगों को इनामी राशि प्रदान की गई। इसके अलावा 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।

सरकार का जोर केवल आत्मसमर्पण कराने तक सीमित नहीं बल्कि हिंसा छोड़ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने पर भी है।

455 लोगों को नौकरी, 129 को जमीन

गृह मंत्री के अनुसार, पुनर्वास प्रक्रिया के तहत 455 लोगों को रोजगार/नौकरी दी गई है, जबकि 129 लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है।

इसके अलावा नक्सल प्रभावित और आत्मसमर्पण करने वाले परिवारों के लिए आवासीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।

4,014 पीएम आवास और 2,308 आदिवासियों का कौशल विकास

अमित शाह ने बताया कि 4,014 प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसरों से जुड़ सकें।

नक्सलवाद के खिलाफ ‘विकास और पुनर्वास’ पर जोर

सरकार की रणनीति में सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास, पुनर्वास, रोजगार, बैंकिंग सुविधा, आवास और कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल को भी इसी व्यापक सेवा और सामाजिक सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से जोड़ा गया। सरकार का संदेश है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और हिंसा से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन का अवसर देना प्राथमिकता है।


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