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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बड़ा boost, ₹4,106 करोड़ के दो अहम रक्षा अनुबंध

•IAF के लिए GSAT-7C संचार उपग्रह और Navy के लिए स्वदेशी वरुणास्त्र टॉरपीडो की खरीद

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता और स्वदेशी रक्षा निर्माण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए GSAT-7C संचार उपग्रह और भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र हेवी वेट टॉरपीडो की खरीद के लिए कुल करीब ₹4,106 करोड़ के दो अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये अनुबंध नई दिल्ली में 15 अक्टूबर को हुए।

🛰️ IAF को मिलेगा GSAT-7C, लागत ₹2,563 करोड़

पहला अनुबंध ₹2,563 करोड़ का है, जिसे रक्षा मंत्रालय ने न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), बेंगलुरु के साथ किया है।

GSAT-7C एक स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित संचार उपग्रह है। इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना की परिसंपत्तियों के बीच सुरक्षित, मजबूत और निर्बाध संचार क्षमता को बढ़ाना है।

इससे वायुसेना की नेटवर्क आधारित संचालन क्षमता और विभिन्न अभियानों के दौरान सुरक्षित संचार व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

⚓ नौसेना को मिलेगा स्वदेशी ‘वरुणास्त्र’

दूसरा अनुबंध ₹1,543 करोड़ का है। इसे भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), हैदराबाद के साथ किया गया है।

वरुणास्त्र एक स्वदेशी पोत से प्रक्षेपित होने वाला हेवी वेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो है, जिसे नौसेना की Naval Science and Technological Laboratory (NSTL) ने विकसित किया है।

इसमें उन्नत मैन्युवरिंग क्षमता है और यह लंबी दूरी से दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम है। इससे भारतीय नौसेना की Anti-Submarine Warfare (ASW) क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी ताकत

इन दोनों अनुबंधों की खास बात यह है कि इनमें महत्वपूर्ण रक्षा और संचार तकनीकों के लिए घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण क्षमता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये समझौते घरेलू रक्षा निर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दोनों अनुबंध सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

एक तरफ आसमान में सुरक्षित संचार, दूसरी तरफ समुद्र में पनडुब्बी रोधी ताकत

इन दोनों परियोजनाओं को एक साथ देखें तो भारतीय रक्षा क्षमता के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूती मिलती है—

वायुसेना: GSAT-7C के जरिए सुरक्षित और निर्बाध संचार नेटवर्क।
नौसेना: वरुणास्त्र के जरिए लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी मारक क्षमता।

यानी ₹4,106 करोड़ का यह रक्षा पैकेज केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वदेशी तकनीक और घरेलू रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 


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