जर्जर चकबंदी कार्यालय पर मंडरा रहा हादसे का खतरा
•खंडहर में तब्दील भवन, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा; बरसात में कार्यालय छोड़कर बाहर निकलने को मजबूर होते हैं कर्मचारी
कादीपुर सुल्तानपुर। तहसील परिसर में स्थित चकबंदी कार्यालय एवं न्यायालय भवन लंबे समय से बदहाली का शिकार है। भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी धराशायी हो सकता है। जर्जर छत, दीवारों और भवन की लगातार खराब होती स्थिति के बीच यहां अधिकारी-कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बारिश का पानी कार्यालय परिसर में भर जाने से कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए कार्यालय से बाहर निकलकर दूसरे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है।
बताया जाता है कि चकबंदी विभाग का संचालन करीब पांच दशक से अधिक समय से हो रहा है, लेकिन विभाग को आज तक अपना व्यवस्थित भवन नसीब नहीं हो सका। 1980 के दशक से पहले चकबंदी कार्यालय और न्यायालय किराये के भवन में संचालित होते थे। इसके बाद तहसील परिसर में उपलब्ध भवन में चकबंदी न्यायालय और कार्यालय स्थापित कर दिया गया। शुरुआत में भवन उपयोग के योग्य था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई। चकबंदी विभाग की ओर से भवन की नियमित मरम्मत और रखरखाव पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। लंबे समय से न तो भवन की समुचित मरम्मत कराई गई और न ही रंग-रोगन हुआ। रखरखाव के अभाव में भवन अब खंडहर का रूप ले चुका है। कई स्थानों पर दीवारों और छत की हालत चिंताजनक है। ऐसे में भवन में बैठकर सरकारी कामकाज करना कर्मचारियों के साथ-साथ यहां आने वाले ग्रामीणों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है।
बरसात के मौसम में जर्जर भवन की समस्या और विकराल हो जाती है। बारिश का पानी भवन के अंदर तक पहुंच जाता है। पानी भरने की स्थिति में कर्मचारियों को कार्यालय छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। इससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है और दूर-दराज के गांवों से अपनी चकबंदी संबंधी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
चकबंदी कार्यालय में बड़ी संख्या में अभिलेख और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए हैं। इनमें चकबंदी प्रक्रिया से जुड़े पुराने और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी शामिल हैं। हालांकि दस्तावेजों को अलमारियों में रखा गया है, जिससे वे काफी हद तक सुरक्षित हैं, लेकिन जर्जर भवन और बारिश के पानी के कारण इन अभिलेखों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि भवन का कोई हिस्सा अचानक गिरता है या पानी लंबे समय तक कार्यालय में भरता है तो महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
चकबंदी अधिकारी शिवा नंद राठौर ने दूरभाष पर बताया कि भवन की स्थिति को लेकर शासन को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया अभी गतिमान है। मीरपुर प्रतापपुर, पाकड़पुर समेत अन्य गांवों में चकबंदी संबंधी कार्य चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का लगातार कार्यालय और न्यायालय में आना-जाना लगा रहता है। जर्जर भवन की स्थिति को देखते हुए यह गंभीर चिंता का विषय है।
इसके बावजूद अभी तक भवन की मरम्मत, जीर्णोद्धार अथवा वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर ठोस कदम सामने नहीं आया है ।





















































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