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श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा झूम उठे श्रद्धालु

देवरिया।लार ब्लॉक के अंतर्गत ग्रामसभा कुणडावलतारा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास आचार्य ब्रजेश मणि त्रिपाठी जी ने कहा कि परमात्मा का वास्तविक स्वरूप व्यापक, निराकार और आनंदरुप है। ईश्वर क्रिया तो नहीं करता है, वो सदैव लीला करते हैं। जीव जो कुछ करता है वह क्रिया ही है, क्योंकि उसकी हर क्रिया के पीछे स्वार्थ, वासना और अभिमान होता है। जो निष्काम भाव से किया गया कार्य है वह लीला है और जो स्वयं को सुखी करने के लिए किया जाता है वह क्रिया है। भगवान दैत्यों को मारते नहीं हैं, तारते हैं अर्थात उद्धार करते हैं। परमात्मा समदर्शी है वह कभी भी पक्षपात नहीं करते हैं, आप ईश्वर के साथ किसी भी भाव से तन्मय होकर अपना संबंध रखिए ईश्वर आपके उस संबंध (नाते) के अनुसार आपको सद्गति प्रदान करेंगे। राजा परीक्षित को सुखदेव जी ने प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से यह बताया की  असुर कुल में जन्म लेने वाले श्री प्रहलाद जी भगवान के अनन्य भक्त हुए। अपनी भक्ति के बल पर उन्होंने भगवान को खंभे से प्रकट किया। भक्त का विश्वास ही भगवान को प्रकट कर सकता है। प्रहलाद जी की सद्वासना है, हिरण्यकशिपु असद्वासना है और साधारण मानव मिश्रवासना है।
कथा व्यास ने आगे गज और ग्राह की कथा सुनाकर संसार की नश्वरता का बोध कराया। वामन चरित्र के माध्यम से बताया कि जब तन, मन, धन तीनों प्रभु की कृपा का अनुभव हो सकता है इसलिए वामन भगवान ने राजा बलि से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी।  कृष्ण कथा जीवन को सुधारती है भगवान कृष्ण कथा की यही महिमा की वह देहभान भुला देती है। अतः सुखदेव स्वामी ने दशम स्कंध के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य की कथा को श्रवण कराया। कृष्ण कथा ही संसार को भुला सकती। पूरा पंडाल नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गूंज से भर उठा कथा में भगवान श्री कृष्ण की सुंदर झांकी भी निकाली गई जिससे सभी आनंदित हुए।


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