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इन्द्र के अभिमान को नष्ट करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत

देवरिया।सलेमपुर नगर के भरौली नवनिर्मित राधा-कृष्ण मंदिर में चल रहे 
 श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन धाम से पधारे हुए आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने भगवान कृष्ण के गोवर्धन लीला का
वर्णन करते हुए  बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र के अभिमान को चूर करने के लिए गिरिराज गोवर्धन को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया। उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार नंद बाबा इन्द्र पूजा की तैयारी कर रहे थे। तब बालक कृष्ण ने प्रश्न किया कि यह पूजा किसकी हो रही है। नंद बाबा ने बताया कि इन्द्र देव वर्षा के देवता हैं, इसलिए उनकी पूजा की जाती है।
इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि हमें अपने कर्म और प्रकृति के प्रतीक गिरिराज की पूजा करनी चाहिए। भगवान के कहने पर सभी ब्रजवासी गिरिराज पूजन के लिए तैयार हो गए, 
कथा के अनुसार, सभी ब्रजवासियों ने श्रद्धा के साथ गिरिराज का पूजन किया। जिससे इंद्र क्रोधित होकर प्रलयकारी वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गिरिराज पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। अंततः इन्द्र का अभिमान टूट गया और उन्होंने भगवान से क्षमा याचना की।
आचार्य ने आगे बताया कि सुरभि गाय ने भगवान का दुग्ध से अभिषेक किया, तभी से गिरिराज पर दूध चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई।
इस अवसर पर अखिलेश पांडे, दुर्गेश पांडे, संजय श्रीवास्तव अतुल श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, धनंजय बरनवाल, विभा तिवारी, विनीता शुक्ला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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