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देश के चौथे स्तंभ के साथियों के लिए शहीद दिवस पर विशेष 'कविता'

मैं पत्रकार हूँ निडर, निष्पक्ष, निर्भिक और ललकार हूँ.............हाँ मैं पत्रकार हूं..... 

ना डर सत्ता की, न ही विपक्ष का गुलाम हूँ। 

 हर अंधेरे का आश और प्रकाश है।।

 मतलब की दुनियां का चौकीदार हूँ ? 

देश का सच्चा पहरेदार हूँ।।

हाँ मैं पत्रकार हूं....... 

 

 

कण कण, रण रण की आवाज हूँ 

जन मानस की पुकार हूँ ।।

 

 हर गली हर युग का धार हूँ । 

 देश का सच्चा पहरेदार हूँ ॥

हाँ मैं पत्रकार हूं...... 

झूठ के नकाब में छिपे दल्लों का काल हूँ। 

 हर भ्रष्ट्राचारी, अपराधी से किया जो-दो- दो हाथ हूँ ।।

 कार्यपालिका, न्यायपालिका , विधायिका का कहने का आधार हूँ।

 हर एक के मुसीबत की आस, खुशियो में उड़ते गुब्बारे के समान हूँ।।

हाँ,मैं पत्रकार हूँ...... 

कल- कल, युग-युग की ग्वाह और जिम्मेदार हूँ।

 हर एक व्यंग और वादों का सरदार हूँ।। 

 प्रदेश में ख़ाकी, देश की वर्दी के दामन समान हूँ।

 हौशलो और बुलंदियों के समान हूँ।।

 हाँ मैं पत्रकार हूं...... 

एक दो नहीं करोडों का जनाधार हूँ । 

 अपनी फर्ज ,लेखनी का कलमकार हूँ।। 

 बेजुबानों असहायों का निविरोधी चुना उम्मीदवार हूँ।

फिर भी एक बरसते बादल और तुफानों के समान है।। 

हाँ ,मैं पत्रकार हूं......... 

 

सूर्य ,धरा, गगन ,सागर सा व्यापक हूँ। 

 हर यादो में महापुरुषों का वाचक हूँ।। 

 सागर सा काननू का जिज्ञासक हूँ। 

 नीति, मानवता का संरक्षक को राष्ट्र‌प्रेम का दावत हूँ।। 

हाँ, मैं पत्रकार हूं........... 

कहे शेखर! 

अब भी किसी के समझ में नहीं आया वही ,पहरेदार हूँ...... 

हाँ मैं पत्रकार हूं......निडर, निष्पक्ष निर्भिक और ललकार हूँ।।


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