Religion and Culture / धर्म और संस्कार

चैत्र नवरात्रि 2026: जानें मुहूर्त, व्रत विधि, पूजन मंत्र, दान और क्या न करें

आजमगढ़/लखनऊ। हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ कल गुरुवार से हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है।
🔸 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
विद्वानों के अनुसार कलश स्थापना का शुभ समय प्रातः 6 बजे से 10 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:45 बजे से 12:30 बजे तक भी शुभ माना गया है। इसी समय घटस्थापना करना अत्यंत फलदायी होता है।
🔸 व्रत एवं पूजन विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ कर कलश स्थापना करें। मिट्टी में जौ बोएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर धूप-दीप जलाएं। इसके बाद फल-फूल अर्पित कर दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती करें।
🔸 पूजन मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इस मंत्र के जाप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
🔸 दान-पुण्य का विशेष महत्व
नवरात्रि में दान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु गरीबों को भोजन, वस्त्र और अनाज का दान करते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करने की भी परंपरा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
🔸 क्या करें और क्या न करें
नवरात्रि के दौरान सात्विक आहार ग्रहण करें और मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज का सेवन न करें। इस दौरान झूठ बोलने, क्रोध करने और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। बाल और नाखून काटने से भी परहेज करना चाहिए।
🔸 आध्यात्मिक संदेश
नवरात्रि का पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई आराधना से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।, 


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