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परीक्षित जन्म और शुकदेव आगमन की कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु

देवरिया।पुरैना शुक्ल (उत्तर प्रदेश): ग्राम पुरैना शुक्ल में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा यज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास ने राजा परीक्षित के जन्म, कलयुग के आगमन और शुकदेव जी के दिव्य प्राकट्य की कथा सुनाई। भक्तिमय भजनों और प्रसंगों के बीच पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।कथा वाचक डॉ मनमोहन मिश्र ने बताया कि जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए निकले, तब परीक्षित ने राज्य संभाला। उनके शासन में धर्म का बोलबाला था, लेकिन कलयुग के प्रभाव और एक भूलवश ऋषि शमीक के गले में मृत सर्प डालने के कारण उन्हें श्रृंगी ऋषि द्वारा सात दिनों में तक्षक नाग से मृत्यु का श्राप मिला।व्यास पीठ से कथा कहते हुए बताया गया कि जैसे ही राजा परीक्षित को मृत्यु के श्राप का पता चला, उन्होंने राज-पाट त्याग कर गंगा तट पर मोक्ष की राह चुनी। जब बड़े-बड़े ऋषि-मुनि परीक्षित की जिज्ञासा शांत न कर सके, तब अवधूत रूप में महर्षि शुकदेव का आगमन हुआ। उनके आते ही समस्त मुनिगणों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया।शुकदेव जी ने परीक्षित को समझाया कि मृत्यु अटल है, लेकिन सात दिनों की भागवत कथा श्रवण से जीव को अभय पद और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।कथा के दौरान जब शुकदेव जी के आगमन का प्रसंग सुनाया गया, तो पूरे पंडाल में 'जय श्री कृष्ण' और 'शुकदेव भगवान की जय' के जयकारे गूंज उठे। उक्त अवसर पर आशीष शुक्ल, सत्यप्रकाश शुक्ल, रामप्रकाश शुक्ल, जयप्रकाश शुक्ल, हरिहर शुक्ल सहित आस-पास के गांव के  भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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