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हनुमान जी को अजर अमर होने का वरदान माता जानकी से मिला

देवरिया।जनपद के सलेमपुर तहसील के अंतर्गत बंजरिया मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर पर चल रहे हनुमत कथा के दौरान आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी ने हनुमत चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि हनुमान जी को अमरता (चिरंजीवी होने) का वरदान मिलना भारतीय अध्यात्म और पुराणों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दिव्य घटना मानी जाती है। यह केवल एक जीवन की लंबी अवधि मात्र नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय उद्देश्य छिपा है।
हनुमान जी को यह दिव्य चमत्कार कई रूपों में प्राप्त हुआ:
1. अष्ट सिद्धियों और नवनिधियों के स्वामी
माता सीता ने अशोक वाटिका में हनुमान जी की भक्ति और सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें 'अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता' का वरदान दिया। इस वरदान के कारण हनुमान जी के पास प्रकृति के तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हुआ, जो उन्हें अजर-अमर बनाता है।
2. देवताओं द्वारा दिए गए सामूहिक वरदान
रामायण के अनुसार, जब बाल्यकाल में हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था, तब इंद्र के वज्र प्रहार से वे मूर्छित हो गए। वायुदेव के क्रोधित होने पर ब्रह्मांड की गति रुक गई। तब सभी देवताओं ने हनुमान जी को पुनर्जीवित किया और अपनी-अपनी शक्तियाँ प्रदान कीं:
ब्रह्मा जी: उन्होंने वरदान दिया कि हनुमान जी को कभी भी कोई ब्रह्म अस्त्र या दिव्य अस्त्र नहीं मार पाएगा।
इंद्र देव: उन्होंने अपना 'वज्र' हनुमान जी पर निष्प्रभावी कर दिया और उन्हें 'इच्छामृत्यु' (अपनी इच्छा से प्राण त्यागने) का सामर्थ्य दिया।
अग्नि और वरुण देव: उन्होंने वरदान दिया कि हनुमान जी कभी अग्नि से नहीं जलेंगे और जल उन्हें हानि नहीं पहुँचा पाएगा।
3. 'चिरंजीवी' होने का आध्यात्मिक रहस्य
हनुमान जी को अमरता मिलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्हें 'राम नाम' का रक्षक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब तक इस पृथ्वी पर भगवान राम का नाम रहेगा, तब तक हनुमान जी सशरीर यहाँ निवास करेंगे। यह एक दिव्य चमत्कार है क्योंकि वे सतयुग, त्रेता और द्वापर (महाभारत काल) में भी उपस्थित थे और कलयुग में भी उनके होने की मान्यता है।
4. काल और समय से परे
अमरता का यह वरदान हनुमान जी को समय के बंधनों से मुक्त करता है। वे काल के प्रभाव से अछूते हैं। भक्त मानते हैं कि वे आज भी गंधमादन पर्वत या सुमेरु पर्वत जैसी गुप्त जगहों पर ध्यानमग्न रहते हैं और जहाँ भी रामकथा होती है, वहाँ सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं।
हनुमान जी का अमर होना इस बात का प्रतीक है कि निस्वार्थ सेवा, भक्ति और ब्रह्मचर्य के बल पर मृत्यु पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।


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