रामेश्वर तिवारी हत्या कांड आरोपियों के घर पर चल सकता है बुलडोजर!
•राजस्व टीम ने शुरू की ग्रामसभा की जमीन की पैमाइश,
परिजनों का आरोप—अवैध कब्जा कर बनाया मकान।
देवरिया। रामेश्वर तिवारी हत्याकांड के चौथे दिन भी भीखम छपरा गांव में तनाव और पुलिस की भारी मौजूदगी बनी हुई है। हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासन की नजर आरोपियों के मकान और जमीन पर भी टिक गई है। गांव में चर्चा तेज है कि यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई तो प्रशासनिक कार्रवाई के तहत मकान पर बुलडोजर चल सकता है।
एसडीएम क्षितिज द्विवेदी के निर्देश पर रविवार को राजस्व निरीक्षक राम एकबाल विश्वकर्मा के नेतृत्व में नौ लेखपालों की टीम गांव पहुंची। टीम ने ग्रामसभा की जमीन की पैमाइश शुरू कर दी। राजस्व टीम की इस कार्रवाई से गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। ग्रामीणों की निगाहें अब पैमाइश की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
परिजनों का आरोप है कि हत्या के आरोपियों ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान का निर्माण कराया है। उनका कहना है कि यदि जांच में कब्जे की पुष्टि होती है तो केवल कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
बताया जा रहा है कि राजस्व टीम अपनी पैमाइश रिपोर्ट एसडीएम सलेमपुर को सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद यदि निर्माण अवैध सरकारी भूमि पर पाया गया तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
इधर, हत्या के बाद गांव में पुलिस बल की तैनाती चौथे दिन भी जारी है। आरोपियों के घरों और आसपास के क्षेत्रों पर पुलिस की निगरानी बनी हुई है। भारी पुलिस मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी और पुलिस की कार्रवाई कब निर्णायक मोड़ लेगी।
रामेश्वर तिवारी हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है। परिवार न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा है। ऐसे में अब पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ राजस्व जांच भी प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन गई है। पैमाइश की रिपोर्ट क्या सामने लाती है और क्या वास्तव में अवैध कब्जे पर बुलडोजर की कार्रवाई होगी—इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिक गई हैं।

























































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