बिना हलफनामे ग्राम प्रधानों के खिलाफ शिकायतों पर रोक लगाने की मांग
देवरिया।संगठन का कहना है कि इन शिकायतों के चलते सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं। विकास कार्यों और जनहित से जुड़े जरूरी कार्यों पर ध्यान देने के बजाय उन्हें निराधार शिकायतों की जांच में अपना समय लगाना पड़ता है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और ग्रामीण विकास की गति पर भी असर पड़ता है।
ज्ञापन में शासनादेश संख्या 3032/33-01-565/2001, दिनांक 8 अक्टूबर 2001 तथा इसके बाद जारी शासनादेशों का हवाला दिया गया है। संगठन ने कहा है कि पूर्व में ग्राम प्रधानों के विरुद्ध शिकायतों के लिए हलफनामा प्रस्तुत करने का प्रावधान निर्धारित किया गया था। ऐसे में वर्तमान प्रशासकों के मामले में भी समान व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि निराधार शिकायतों पर रोक लग सके।
संगठन ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि आईजीआरएस, तहसील दिवस अथवा अन्य माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों में शिकायतकर्ता द्वारा शपथपत्र और संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य किया जाए। साथ ही इस संबंध में स्पष्ट शासनादेश जारी कर अधिकारियों को उसका कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए जाएं।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिकायत करने का अधिकार सभी को है, लेकिन इस अधिकार का दुरुपयोग कर किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासक को अनावश्यक रूप से परेशान करना उचित नहीं है। यदि किसी के पास भ्रष्टाचार, अनियमितता अथवा अन्य किसी गड़बड़ी से संबंधित ठोस प्रमाण हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन केवल व्यक्तिगत रंजिश या दुर्भावना से की गई शिकायतों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। संगठन ने शासन से जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शीघ्र आवश्यक आदेश जारी करने की अपील की है।
संगठन का मानना है कि इस व्यवस्था से जहां वास्तविक शिकायतों की निष्पक्ष जांच का रास्ता खुला रहेगा, वहीं झूठी शिकायतों के माध्यम से ग्राम प्रधानों और प्रशासकों को परेशान करने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।


























































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