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आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना पुरैना शुक्ल, श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा जनसैलाब

देवरिया।बरहज तहसील क्षेत्र के ग्राम पुरैना शुक्ल में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा यज्ञ के पावन अवसर पर समूचा क्षेत्र 'राधे-राधे' के जयघोष से गुंजायमान है। कथा के विशेष सत्र में सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. मनमोहन मिश्र ने शुकदेव-परीक्षित संवाद के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल और सारगर्भित शैली में श्रद्धालुओं के सम्मुख प्रस्तुत किया।
चतुश्लोकी भागवत में समाहित है सृष्टि का सार कथा व्यास डॉ. मिश्र ने व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्रीकृष्ण का शब्दमयी स्वरूप है। उन्होंने चतुश्लोकी भागवत की व्याख्या करते हुए बताया कि इन चार श्लोकों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और लय का रहस्य छिपा है। सृष्टि क्रम और भगवान के विराट रूप का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि कण-कण में ईश्वर का वास है, बस उसे देखने के लिए भक्ति रूपी दृष्टि की आवश्यकता है।
विदुर जी का प्रसंग और माता सती का दिव्य चरित्र कथा के दौरान विदुर जी के पूर्व जन्म के प्रसंग ने श्रोताओं को कर्म और धर्म की सूक्ष्मता से परिचित कराया। वहीं, माता सती के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए डॉ. मिश्र ने उनके त्याग और भगवान शिव के प्रति अटूट निष्ठा की कथा सुनाई। सती चरित्र के माध्यम से उन्होंने सामाजिक मूल्यों और सतीत्व की महत्ता पर प्रकाश डाला, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे।इस पुनीत अवसर पर मुख्य रूप से सुमित्रा देवी, काशीपति शुक्ल, सत्यप्रकाश शुक्ल, नरसिंह शुक्ल, जयप्रकाश शुक्ल और सुमन्त मणि त्रिपाठी, गजेंद्र शुक्ला, रवींद्र शुक्ला, रमेश शुक्ला, शशि भूषण शुक्ला, रामकृपाल शुक्ला, राजेश प्रजापति, फेकू प्रजापति, गणेश प्रजापति, संगीता देवी, बबीता सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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