Latest News / ताज़ातरीन खबरें

ऐतिहासिक श्री हनुमंत कथा के द्वितीय दिवस

देवरिया।ग्राम बंजरिया सलेमपुर में चल रहे हनुमत कथा के दूसरे दिन आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी ने हनुमत चरित्र पर कथा का रसपान करते हुए कहां कि 

रामदूत अतुलित बलधामा 
                                  
अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।।                        
हे पवनसुत! आप अतुलित बल के धाम हैं।
ब्रह्मा जी की सृष्टि में जिस किसी भी लोक में, जो भी वस्तु है, जो भी व्यक्ति है, उन सभी के बल की कुछ काल तक वृद्धि होती है। कुछ काल के पश्चात वह वस्तु बलहीन हो जाती है, और वह व्यक्ति, बलहीन हो जाता है।
इस संसार में तो यह अकाट्य नियम है कि सभी शरीरधारियों का शारीरिक बल,तथा सभी शरीरधारियों का बुद्धिबल, तथा सभी शरीरधारियों का इन्द्रियबल इन तीनों प्रकार के बलों की उत्पति होती है। जिसकी उत्पत्ति होती है,वह एक सीमातक ही वृद्धिंगत होता है। उस सीमा तक पहुंचते ही क्षीण होने का क्रम प्रारम्भ हो जाता है। क्षीण होते होते सभी
प्रकार के बलों का विनाश हो जाता है।
हे रामदूत! आपका बल तो अतुलनीय है। इस मायामय जगत में ऐसी कोई भी वस्तु इतनी गुरुतम अर्थात भारी नहीं है, जिसको आप तृण के समान उठाकर अन्यत्र न ले जा सकते हों। इस विश्व में ऐसा कोई भी ज्ञान नहीं है, जो आपसे अज्ञात हो। ऐसी कोई वस्तु, व्यक्ति या स्थान नहीं है, जहां आप पहुंच न सकते हों।
हे अबाधितगतिशील! आपकी गति को अवरुद्ध करने के लिए इस संसार में में कोई भी देवता, दानव, मानव नहीं है। आपकी सर्वत्र अबाधित अव्याहत गति है। आपकी अनन्तशक्ति को सीमितशक्ति के जीव, व्यवधान भी करने में समर्थ नहीं हैं तो, समता करने की तो वार्ता ही क्या है?हेअंजनिपुत्र! आप सर्वगुणसंपन्न, सर्वबलसम्पन्न हैं। आप जैसे दिव्यपुत्र की जन्मदात्री मां अंजना भी इस लोक की सामान्य स्त्री नहीं है। जगद्धारक वायुतत्त्व को धारण करनेवाली माता अंजना का गर्भ, सत्कर्मदुष्कर्मभोक्त्री साधारण स्त्री का गर्भ नहीं है।
माता अंजना का गर्भ भी अतुलितबलधारक है।
हे प्रभो! आप भी असाधारण हैं, तथा आपकी माता अंजना भी असाधारण हैं। न तो आप इन लोकों के जीवों के समान हैं, और न ही आपकी माता, इन लोकों की माता के समान हैं।आप श्रीराम जी के दूत हैं। आप ही उनके दूत होने योग्य हैं। क्यों कि जिस श्रीराम के बल की सीमा नहीं है। वे सत्यरक्षक, सत्यपालक तथा सत्यधारक हैं।
हे पवनतनय! स्वामी सामर्थ्यवान होते हैं, तो वे अपने समान सामर्थ्यवान दूत को ही समीप में रखते हैं।
वैसे भी ये तो स्वत: सिद्ध है कि जिसका दूत अतुलितबलधाम होगा, जो ज्ञानगुणसागर होगा, उसका स्वामी भी ऐसे दूत से निश्चित ही श्रेष्ठतम ही होगा।
ये भी जगतप्रसिद्ध है कि अपने से श्रेष्ठ के प्रति ही श्रद्धा और अनन्यनिष्ठा होती है।
हे अंजनानंदन! आपकी श्रेष्ठता से श्रीराम की श्रेष्ठता सिद्ध होती है। जिनका दूत ही सर्वसामर्थ्यशाली है तो इनको वरदान प्रदान करनेवाले तो भगवान ही होंगे। आप जैसे तो भगवान के ही सेवक और दूत होते हैं। भगवान के भी सेवक और दूत आप जैसे ही होते हैं।
श्रीराम जी जैसा कोई स्वामी नहीं हो सकता है, और आपके जैसा कोई दूत और सेवक नहीं हो सकता है।
स्वामी श्रीराम भी अनन्य हैं, तथा सेवकरूप आप भी अनन्य हैं। आप दोनों जैसा भी कोई नहीं है, तो समानता की तो वार्ता ही क्या हैं।
 कथा के दौरान विनय तिवारी,बृजेश तिवारी, विजय तिवारी, हरिओम तिवारी, गामा,  दिलीप कुमार ,अटल, सत्य प्रकाश, कन्हैयालाल, जयप्रकाश गुप्ता,सुमेर प्रसाद ,राजीव प्रसाद, अशोक यादव, जितेंद्र यादव, योगेंद्र, आदर्श तिवारी, शिवम मिश्र, सत्यम, योगेश, राजीव सहित अन्य श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


Leave a comment

Educations

Sports

Entertainment

Lucknow

Azamgarh