निशच्यात्मिक बुद्धि का नाम ही ध्रुव है। कृष्ण चंद्र शास्त्री
देवरिया।देवरिया जिले के मईल थाना क्षेत्र स्थित देवढ़ी गांव में चंद्रेश्वर महादेव धाम ट्रस्ट देवढ़ी के द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के सुविख्यात भागवतभास्कर श्री कृष्ण चंद्र ठाकुर जी महाराज कथा व्यास ने आज तीसरे दिन मुख्य यजमानअक्षयवर मिश्र व सूर्य नारायण मिश्र जी ने ब्यास पीठ का पूजन कर कथा की शुरुआत किया। ध्रुव चरित्र के बारे में कहा कि वास्तव में निश्चयात्मक बुद्धि को ध्रुव कहते हैं ।
जब तक प्रभु प्राप्ति के निमित भाव निश्चयात्मक नहीं बनता तब तक प्रभु की प्राप्ति असंभव है ।
उन्होंने कहा कि मां चाहे तो बालक को भक्त बना दे । बालक का चरित्र निर्माण करने वाले प्रथम गुरु मां होती है । ध्रुव की मां का नाम सुनीति हैं । अर्थात शास्त्रों के नीति पर चलने का नाम ठाकुर जी ने कहा कि किसी का बुरा मत सोचो किसी का बुरा मत करो किसी का बुरा मत होने दो तो संसार में किसी की ताकत नहीं जो तुम्हारा बुरा कर दे । गुरु का स्थान शास्त्रों में सर्वोच्च होता है । गुरु उसे कहते हैं।जो शिष्य के हृदय के अंधकार को नष्ट कर उसमें सुंदर ज्ञान का प्रकाश भर दे। इसलिए जीवन में गुरु बनाना परम आवश्यक है।बिना गुरु के प्राणी का कल्याण संभव नहीं होता ।
इसके उपरांत श्री ठाकुर जी ने पृथु चरित्र,जड़ भरत चरित्र,नरको का वर्णन, भगवान निष्ठा से संबंधित भगवान के परम भक्त प्रहलाद जी का पावन चरित्र का श्रवण कराया ।आज कथा में प्रमुख रूप से कार्यक्रम का संचालन प्रमोद मिश्रा ने किया।
चंद्रेश्वर महादेव धाम समिति के सभी सदस्यों और समस्त ग्राम वासी गण क्षेत्रवासियों के इस पावन आयोजन के लिए धन्यवाद के पात्र हैं।


























































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