पुलिस की नाक के नीचे चल रहा प्रतिबंधित थाई मांगुर का बड़ा बाजार, कोतवाली से महज 50 मीटर दूर खुलेआम बिक रही खतरनाक मांगुर मछली
सैदपुर। नगर स्थित कोतवाली से महज 50 मीटर की दूरी पर ही प्रतिबंध के बावजूद थाई मांगुर मछली बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से बेची जा रही है। जिसका वीडियो अब जाकर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वही स्थानीय लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के वाहक के रूप में जानी जाने वाली उक्त मछली क़ो आसानी से खरीदकर सेवन कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस सहित जिम्मेदार अधिकारी मांगुर मछली की खरीद व बिक्री पर अंकुश लगाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। बता दें कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के नुकसान सहित अन्य कारणों से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मांगुर मछली को वर्ष 2000 में ही प्रतिबंधित कर दिया था। वर्तमान में मांगुर मछली के पालन व बेचने पर रोक है और ऐसा करते मिलने पर कार्रवाई का नियम है। बावजूद इसके नगर स्थित कोतवाली से महज 50 मीटर दूर थोक मछली व्यापारी सुभाष सोनकर के द्वारा क्षेत्र में धड़ल्ले से यह मछली बेची जा रही है। बीते 3 मार्च को उक्त मछली पिकअप गाड़ी में रखकर बेचने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उक्त मछली बेचने की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा कोतवाल सहित जिम्मेदार अधिकारियों क़ो दी गयी थी, बावजूद इसके महज 50 मीटर दूर भी कोई नहीं पहुंच सका, जिससे कोई कार्यवाही नहीं की गई। पुलिस व मत्स्य विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते स्थानीय बाजार, बीएसएनएल ऑफिस, जौहरगंज, सादात रोड, सब्जी मण्डी, थाने के पास सहित हसनपुर डगरा, बौरवां चट्टी आदि दर्जनों जगहों पर जहां खुलेआम फुटकर में ये मछली बेची जा रही है, वहीं कस्बे में ही अन्य जगहों पर थोक विक्रेताओं द्वारा भी इसकी खरीद-बिक्री की जा रही है। जहां देशी मछलियां 250-600 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती है, तो मांगुर मछली 100-150 रुपये में उपलब्ध होती है। कम कीमत होने के कारण गरीब परिवारों को यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है, लेकिन उन्हें इसके गंभीर जलीय दुष्प्रभाव का अंदाजा नहीं है। आरोप है कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से सैदपुर के कोतवाली के बगल के पास स्थित गोदाम में मांगुर मछली बाहर से मंगवाकर इकट्ठा की जाती है और फिर यहीं से पिकअप द्वारा सभी जगहों पर भेजी जाती है। बता दें कि मांगुर तेज प्रजनन वाली मछली की प्रजाति है। अन्य मछलियों की अपेक्षा इस मछली का विकास दोगुनी तेजी से होता है। इसलिए यह मछली सस्ती मिलती है। इस पर प्रतिबंध का मुख्य कारण ये है कि ये मछली मांसाहारी है और अन्य मछलियों सहित जलीय जीवों को खाकर मछलियों की स्थानीय प्रजातियों को खत्म कर देती है। साथ ही इस मछली में भारी मात्रा में पारा यानी मरकरी पाया जाता है तो खाने वालों में कैंसर सहित दिमाग व तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि अन्य मछलियों की अपेक्षा प्रतिबंध के बाद भी लोग इसका पालन व बिक्री कर रहे हैं।























































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